थोक महंगाई 5 महीने के टॉप पर, क्या करेंगे मोदी?
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महंगाई के मोर्चे पर मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा शुरू हो गई है। कमजोर मानसून की आहट के साथ ही थोक महंगाई पिछले पांच महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
मई में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई 6.01 फीसदी तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल इस दौरान यह 4.58 फीसदी थी। इससे पहले अप्रैल में थोक महंगाई 5.20 फीसदी थी। महंगाई की यह आग खाने-पीने की चीजों और ईंधन के महंगा होने से ज्यादा भड़की है।
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई 9.50 फीसदी बढ़ी है। इस दौरान आलू करीब 31 फीसदी महंगा हुआ, जबकि फलों के दाम 19.40 फीसदी तक बढ़ चुके हैं।
प्याज की कीमतें बढ़ाएगी आफत
हालांकि प्याज की कीमतों में करीब तीन फीसदी की कमी आई है। सब्जियों की थोक महंगाई में भी करीब एक फीसदी की मामूली गिरावट है। लेकिन अंडा, मांस और मछली पर बढ़ी 12.47 फीसदी महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ने की पूरी तैयारी कर दी है। रही-सही कसर दूध की 9.57 फीसदी चढ़ी कीमतों ने पूरी कर दी।
खाने-पीने की चीजों की अलावा फैक्ट्री में बनने वाले सामानों पर भी 3.55 फीसदी महंगाई है। हालांकि, खाद्य तेलों और चीन की महंगाई में 0.88 और 1.98 फीसदी की कमी आई है, लेकिन तंबाकू और पेय पदार्थों के की महंगाई 8.45 फीसदी तक पहुंच गई है।
महंगाई पर काबू पाने के दावे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार कमजोर मानसून के मद्देनजर महंगाई से निपटने में जुट गई है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि और खाद्य मंत्रियों के साथ बैठक कर सूखे के लिए एक्शन प्लान मंगाया था।
उद्योग जगत की चिंता बढ़ी
थोक महंगाई बढ़ने से आम आदमी के अलावा उद्योग जगत की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। सीआईआई के महासचिव चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि औद्योगिक उत्पादन को उबारने के लिए महंगाई को काबू में रखना बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि महंगाई की वजह से रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती से हिचक रहा है। हाल में आए खुदरा महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जगा दी थी।
खाद्य महंगाई से निपटे रेस्पॉन्स टीम-फिक्की
फिक्की के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला के मुताबिक अच्छी बात यह है महंगाई पर काबू पाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसके लिए फिक्की ने प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत एक फूड इंफ्लेशन रेस्पॉन्स एंड स्ट्रैटजी टीम (फर्स्ट) गठित करने का सुझाव दिया है। जो खाद्यान्न उत्पादन, भंडारण और बाजार भाव के रीयल टाइम आंकड़ों के आधार पर महंगाई से मुकाबले की रणनीति तैयार करेगी।