{"_id":"4fe7ff7a-31a7-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"what-about-anonymous-investment-in-ponti-chadha-company","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्या होगा बेनामी निवेश का","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
क्या होगा बेनामी निवेश का
अजित सिंह राठी/देहरादून
Updated Sun, 18 Nov 2012 11:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शराब और खनन के कारोबार में एक छत्र राज करने के बाद पोंटी का उत्तराखंड में हाइड्रो पावर व हाउसिंग में हाथ आजमाने का ख्वाब पूरा नहीं हुआ। लेकिन खास बात ये है कि ऑफ द रिकॉर्ड जितना पैसा पोंटी चड्ढा का उत्तराखंड में लगा है, उतना ही राज्य के कुछ धन कुबेरों ने भी पोंटी के साम्राज्य में निवेश कर रखा था। लेकिन बेनामी।
विज्ञापन
जानकारों की माने तो राज्य में गोला नदीं से सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का खनन कारोबार होता है। यह क्षेत्र अभी भी पोंटी के कब्जे में बताया जाता है। इसके अलावा लॉटरी सिस्टम होने के बावजूद अभी भी शराब का एक चौथाई कारोबार पोंटी की जेब से चलता है।
विज्ञापन
रियल एस्टेट और होटल सेक्टर में बड़ा दखल पोंटी का था। यह बड़ा सवाल है कि अब कारोबार की इस रियासत को कौन संभालेगा? उत्तराखंड में अलग-अलग नाम से कारोबार करने वाली ऐसी आधा दर्जन कंपनियां हैं जिसमें पोंटी का पैसा लगा है। अब यह पैसा कैसे वापस होगा।
विज्ञापन
इसी तरह राज्य के कई राजनेताओं से लेकर ब्यूरोक्रेट्स और धनकुबेरों का बेनामी धन पोंटी की कंपनी में लगा है। अब उनके लिए भी निवेश वापसी की राह मुश्किल होगी। उत्तराखंड के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए पोंटी अरसे से सक्रिय था। पिछली सरकार में आवंटन निरस्त होने से उसकी हसरत मन में ही रह गई थी। अब उसने फिर कोशिश शुरू कर दी थी।
अपनों ने कई बार चलाए खंजर
पिछले ढाई दशक से कारोबार बढ़ाने में लगे पोंटी की पीठ पर उसके अपनों ने ही कई बार खंजर चलाए थे। दस साल पहले पहली बार पंजाब में उसके नजदीकी रिश्तेदार ने शराब के कारोबार में कई करोड़ की चपत लगाई। इसी तरह उत्तराखंड और यूपी में भी उसके दो सिपहसालारों ने दगा दिया। लेकिन पोंटी ने प्रतिशोध लेने की बजाय अलग होना मुनासिब समझा।