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रुपए की पिटाई से फार्मा इंडस्ट्री धराशाई, हजारों बेरोजगार

Sat, 24 Aug 2013 02:16 AM IST
सोलन/अखिलेश महाजन
सोलन/अखिलेश महाजन Updated Sat, 24 Aug 2013 02:16 AM IST
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weak rupee affect farma industry

डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट ने हिमाचल प्रदेश के उद्योग जगत को बुरी तरह हिला कर रख दिया है। रुपए के लगातार लुढ़कने से सबसे अधिक फार्मा उद्योग धराशाई हुए हैं।

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रुपए के मूल्य में गिरावट का तर्क देकर सोलन, परवाणू में करीब 100 फार्मा यूनिटों को बंद कर दिया गया है। इसकी पुष्टि जिला उद्योग विभाग ने भी की है। पूरे प्रदेश से करीब 175 उद्योगों ने पलायन किया है।
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खास बात यह है कि औद्योगिक पैकेज का दस साल का लाभ उठाने के बाद उद्योग संचालकों ने रुपए में गिरावट का तर्क देकर उद्योगों को बंद कर दिया है।

कहा जा रहा है कि पिछले छह माह के दौरान बीबीएन समेत प्रदेश में उद्योगों के पलायन का आंकड़ा 175 तक पहुंच चुका है।

सोलन (बीबीएन) से सालाना 5,500 करोड़ रुपए के आयात-निर्यात का कारोबार विदेशों से होता है। वहीं, जिला उद्योग स्थापित करने के लिए स्थापित लैंड बैंक में आवेदन आना बंद हो चुके हैं।
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अफसरों का कहना है रुपए में गिरावट के बाद 1,162.82 बीघा खाली जमीन के प्लाटों के लिए कोई आवेदन नहीं कर रहा है।

सोलन में 1,600 फार्मा उद्योग
हिमाचल प्रदेश में कुल 39 हजार 512 औद्योगिक इकाइयां हैं। इसमें 39 हजार 018 स्मॉल स्केल और 494 मीडियम और लार्ज स्केल की हैं। करीब 02 लाख 97 हजार लोगों को इन उद्योगों में रोजगार हासिल हुआ है।

वहीं फार्मा हब जिला सोलन/बीबीएन में सर्वाधिक 5424 इंडस्ट्री हैं, जिसमें 1600 फार्मा ही हैं। प्रदेश भर में फार्मा उद्योगों की संख्या करीब 2,500 है। इनमें से मार्च 2013 से लेकर अब तक करीब 100 उद्योग बंद हो चुके हैं ।

3,000 कर्मचारी बेरोजगार
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बंद हुए उद्योगों के कारण 2,500 से 3,000 कर्मचारी बेरोजगार हुए हैं। बंद उद्योगों के कारण भविष्य में प्रदेश में औद्योगिक समृद्धता पर फर्क पड़ सकता है। कंपनियों के न आने से राजस्व के साथ साथ रोजगार सृजन में भी फर्क पड़ सकता है।

कच्चे माल में 70 फीसदी की गिरावट
कारोबारियों के मुताबिक रुपए के लगातार धराशाई होने से विदेशों से आने वाले वाले कच्चे माल में 70 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। कारण डॉलर के मुकाबले रुपया 63.25 और पाउंड 100 रुपए से ऊपर जा चुका है। इसका असर उत्पादन पर पड़ा है।

मार्केट की डिमांड पूरी करने में भी पसीने छूट रहे हैं। सोलन जिले में सालाना 3000 करोड़ का कच्चा माल आयात किया जाता है जबकि करीब 2500 करोड़ का माल निर्यात होता है। जिले में 5500 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार है।

रुपए की गिरावट से उद्योग जगत चिंतित है। करंट अकाउंट डेफिशिट काफी ज्यादा है। महंगी कीमत पर कच्चा माल विदेशों से मंगवाया जा रहा है। उत्पादन लागत बढ़ रही है। निर्यात में कमी से उद्योग जगत संकट में है।--राजेंद्र गुलेरिया, अध्यक्ष बीबीएनआईए


रुपए में लगातार गिरावट का असर उद्योगों पर पड़ा है। पिछले छह माह के दौरान सोलन जिले के 100 उद्योग बंद हो चुके हैं। बंद होने वाले उद्योग फार्मा सेक्टर के हैं।--यशपाल शर्मा, महाप्रबंधक उद्योग विभाग, सोलन

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