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मोदी बजट के लिए 'विलेन' बनेगी मौसम की बेरुखी

Thu, 26 Jun 2014 11:55 AM IST
Updated Thu, 26 Jun 2014 11:55 AM IST
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weak monsoon may effect modi government's  first budget
इस साल मानसून सूखा रहने का खतरा बढ़ता जा रहा है। पिछले हफ्ते मानसून काफी कमजोर रहा, जिसके चलते उत्तरी राज्यों में अच्छी बारिश के लिए जुलाई तक इंतजार करना पड़ सकता है। इस सीजन में अभी तक औसत से 37 फीसदी कम बारिश हुई है।
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मौसम की बेरुखी मोदी सरकार के पहले बजट को सूखा केंद्रित बनाने पर मजबूर कर सकती है। एक तरफ कृषि उत्पादन घटने से महंगाई की आग भड़कने का खतरा है तो दूसरी ओर सूखे जैसे हालात ग्रामीण मांग को झटका दे सकते हैं।
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सब्जियों के दामों में लगेगी आग

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मौसम विभाग के अनुसार, अगले 3-4 दिन भी मानसून कमजोर रहने की आशंका है। लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हो सकती है।

बारिश में कमी की मार धान, दलहन, तिलहन, मोटे अनाजों के अलावा फल-सब्जियों के उत्पादन पर भी पड़ेगी। एक जून से अब तक दिल्ली की थोक मंडियों में प्याज के दाम 1,105 रुपये से बढ़कर 1,300 रुपये प्रति क्विंटल और आलू 1,478 रुपये से बढ़कर 1,750 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुके हैं।

मोदी जी कुछ तो उपाय कीजिए

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कमजोर मानसून का सबसे ज्यादा असर मध्य भारत में है, जहां औसत से 51 फीसदी कम बारिश हुई है। दलहन और तिलहन उत्पादन में अग्रणी मध्य भारत की अधिकांश खेती वर्षा आधारित है।

एचएसबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश में 10 फीसदी कमी आने पर खाने-पीने की चीजों की महंगाई 2.8 फीसदी और खुदरा महंगाई 1.3 फीसदी तक बढ़ सकती है। इसे देखते हुए आगामी 10 जुलाई को पेश होने वाले आम बजट में सूखे और महंगाई से निपटने के लिए खास उपाय करने पड़ेंगे।

ऐसे में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर भी पानी फिर सकता है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी का कहना है कि अगर मानसून में सुधार नहीं आया तो बजट में सूखे से निपटने के उपायों पर सरकार को खर्च बढ़ाना पड़ेगा।
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'सूखा मानना अभी जल्दबाजी '

weak monsoon may effect modi government's  first budget
कृषि आयुक्त जेएस संधू का कहना है कि खेती पर मानसून के असर के लिए 15 जुलाई तक इंतजार करना चाहिए। अभी सूखे जैसे हालात कहना जल्दबाजी होगा। कई बार ऐसा हुआ है कि जून में कम बारिश के बाद जुलाई में अच्छी बारिश हुई।

हालांकि आंकड़े कह रहे हैं कि बारिश में कमी के चलते खरीफ की बुवाई जोर नहीं पकड़ पाई है। गत 21 जून तक 95 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई हुई जो पिछले साल से करीब 14 लाख हेक्टेअर कम है।

धान की बुवाई सिर्फ 7.59 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में हुई है जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 16.4 लाख हेक्टेअर तक पहुंच गया था। दलहन की बुवाई 2.60 लाख और तिलहन की बुवाई 1.23 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में हुई है, जो गत वर्ष से काफी कम है।

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