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भारत में आने को वॉलमार्ट ने खर्च किए 125 करोड़
वाशिंगटन/नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Sun, 09 Dec 2012 06:42 PM IST
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रिटेल में एफडीआई की राह खुलते ही वॉलमार्ट और इसके जैसी अन्य कंपनियों के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट इस पल का कई सालों से इंतजार कर रही थी।
कंपनी ने अमेरिकी कानून निर्माताओं के साथ भारत में एफडीआई का रास्ता खोलने के लिए जमकर लॉबिंग की थी। वर्ष 2008 से शुरू किए गए लॉबिंग के इस सिलसिले के दौरान 2012 तक करीब 125 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
वॉलमार्ट द्वारा जारी रिपोर्ट में यह आंकड़े सामने आए है। इसके मुताबिक भारत में निवेश की संभावनाएं तलाशने और भारत में एफडीआई से संबंधित मुद्दों को लेकर अमेरिका में कई गतिविधियां आयोजित की गईं। सितंबर 2012 के अंत में ही इस पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वॉलमार्ट ने एफडीआई के मुद्दे पर यूएस सीनेट, यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव, यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव और यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के साथ जमकर लॉबिंग की। रिपोर्ट के अनुसार इस साल कंपनी भारत में एफडीआई से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में 18 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।
गौरतलब है कि वॉलमार्ट का वार्षिक टर्नओवर 444 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है। वहीं भारत की रिटेल मार्केट करीब 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर की है, जबकि 2020 तक यह 1 ट्रिलियन डॉलर के पार होने की संभावना है।
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कंपनी ने अमेरिकी कानून निर्माताओं के साथ भारत में एफडीआई का रास्ता खोलने के लिए जमकर लॉबिंग की थी। वर्ष 2008 से शुरू किए गए लॉबिंग के इस सिलसिले के दौरान 2012 तक करीब 125 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
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वॉलमार्ट द्वारा जारी रिपोर्ट में यह आंकड़े सामने आए है। इसके मुताबिक भारत में निवेश की संभावनाएं तलाशने और भारत में एफडीआई से संबंधित मुद्दों को लेकर अमेरिका में कई गतिविधियां आयोजित की गईं। सितंबर 2012 के अंत में ही इस पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वॉलमार्ट ने एफडीआई के मुद्दे पर यूएस सीनेट, यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव, यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव और यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के साथ जमकर लॉबिंग की। रिपोर्ट के अनुसार इस साल कंपनी भारत में एफडीआई से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में 18 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।
गौरतलब है कि वॉलमार्ट का वार्षिक टर्नओवर 444 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है। वहीं भारत की रिटेल मार्केट करीब 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर की है, जबकि 2020 तक यह 1 ट्रिलियन डॉलर के पार होने की संभावना है।