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वॉलमार्ट ने एफडीआई पर फिर शुरू की लॉबिंग

Mon, 28 Oct 2013 11:47 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 28 Oct 2013 11:47 AM IST
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wallmart again start lobbing in india

अमेरिका की दिग्गज रिटेल कंपनी वालमार्ट द्वारा भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) संबंधी मामलों को लेकर लॉबिंग पर 15 लाख डॉलर खर्च करने की खबर है।

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दूसरी ओर, नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाले टाटा समूह ने आव्रजन संबंधी सुधारों व तकनीकी शिक्षा जैसे मामलों को लेकर दो साल बाद एक बार फिर से अमेरिका में लॉबिंग शुरू कर दी है।
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अमेरिकी सांसदों के साथ लॉबिंग


ग्लोबल रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने गत 30 सितंबर को समाप्त हुई तिमाही में भारत में एफडीआई के मुद्दे पर अमेरिकी सांसदों के साथ लॉबिंग की और करीब 50 से अधिक मुद्दों पर 15 लाख डॉलर से अधिक खर्च किए हैं।
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अमेरिकी सीनेट में पेश की गई 19 पेज की डिस्क्लोजर रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर बहस कारोबार के 10 अहम मुद्दों में से एक है, जिसे वॉलमार्ट की ओर से रजिस्टर्ड लॉबिस्ट ने उठाया।

अमेरिकी कांग्रेस के रिकॉर्ड के मुताबिक वॉलमार्ट ने भारत से जुड़े मसलों पर अमेरिकी सांसदों और फेडरल एजेंसियों के साथ लॉबिंग सितंबर पूर्व की तिमाही में रोक दी थी।

टाटा ने लॉबिंग पर खर्च किए करोड़ो

दूसरी ओर, अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए नए लॉबिंग डिस्क्लोजर फार्म के मुताबिक टाटा समूह की टाटा अमेरिका इंटरनेशनल कॉरपोरेशन और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) उन कंपनियों में शामिल रहीं, जो गत 30 सितंबर को समाप्त हुई तिमाही में लॉबिंग की गतिविधियों में शामिल रहीं।

इनमें से टाटा अमेरिका इंटरनेशनल ने प्रत्यक्ष रूप से, जबकि टीसीएस ने बैनर पब्लिक अफेयर्स के जरिए लॉबिंग की। रिकॉर्ड के मुताबिक टाटा की कंपनियों ने 2013 में अब तक अपनी लॉबिंग पर दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं।


गौरतलब है कि इस माह की शुरुआत में वालमार्ट ने भारत में अपने थोक खुदरा कारोबार के लिए भारती समूह के साथ अपना करार समाप्त कर लिया।

वॉलमार्ट ने भारत सरकार के साथ मल्टी ब्रांड रिटेल कारोबार में एफडीआई नियमों और छूट देने की गुजारिश की है। फिलहाल, भारत के मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी विदेशी निवेश को अनुमति है।

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