{"_id":"43b265b1b7517ae0432a7c32d6f65eb4","slug":"various-change-will-happen-in-planning-commission-after-new-government-formation","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार बदलते ही बदल जाएगी योजना आयोग की सूरत","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
सरकार बदलते ही बदल जाएगी योजना आयोग की सूरत
सुजय मेहदूदिया/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 13 May 2014 03:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजनीतिक दलों सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का मानना है कि योजना आयोग के मौजूदा स्वरूप एवं भूमिका में आमूल-चूल बदलाव आवश्यक है।
विज्ञापन
विशेषज्ञों का कहना है कि आयोग के मौजूदा स्वरूप को भंग करने के साथ-साथ उसकी भूमिका नए सिरे से तय करनी जरूरी है। वैश्विक परिदृश्य और बदलते आर्थिक हालात में बेहतर विकास के लिए आयोग को नई भूमिका में लाना अनिवार्य है। इससे सत्ता के विकेंद्रीकरण के साथ-साथ वास्तविक संघीय ढांचे को सामने लाया जा सकेगा।
विज्ञापन
विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र से राज्यों को वित्त आयोग के माध्यम से नियमित आधार पर फंड को हस्तांतरित किया जा सकता है। संविधान के मुताबिक वित्त आयोग यह दायित्व निभाने में सक्षम है। योजना आयोग की भूमिका में बदलाव की आवश्यकता पर कट्स इंटनरेशनल (कंज्यूमर यूनिटी एवं ट्रस्ट सोसायटी) के महासचिव डॉ. प्रदीप मेहता का कहना है कि आयोग की पहली भूमिका केंद्र और राज्यों को जटिल आर्थिक नीतियों पर सलाह देने की होनी चाहिए।
विज्ञापन
यह सलाह सघन रिसर्च, डाटा कलेक्शन एवं विश्लेषण और प्रस्तावित व प्रचलित नीतियों के असर के मूल्यांकन के आधार पर होनी चाहिए। आयोग की दूसरी भूमिका विभिन्न सरकारी विभागों, केंद्र व राज्य सरकारों और विभिन्न राज्य सरकारों के बीच समन्वय की सुविधा उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। डॉ. मेहता का कहना है कि इन कार्यों के कार्यान्वयन के लिए आयोग के हर राज्य में कार्यालय होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी कार्यालयों का ऑनलाइन केंद्रीय रिपॉजिटरी से जुड़ा होना जरूरी है, जहां सभी डेटा, रिपोर्ट, बैठकों के मिनट्स, सिफारिशें आदि अपलोड होने चाहिए। आयोग का प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क समाप्त किया जाना चाहिए।
इसके अलावा आयोग के सभी सदस्यों एवं अधिकारियों की नियुक्ति एक पारदर्शी एवं सख्त प्रक्रिया से की जानी चाहिए। साथ ही उनके प्रदर्शन का आकलन एक निर्धारित मानदंड के अनुरूप होना चाहिए। चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग (एनडीआरसी) है, जिसके हाथ में अर्थव्यवस्था को लेकर पूरी तरह प्रशासकीय और प्लानिंग नियंत्रण है।
कट्स की ओर से ‘राजकोषीय संघीय स्वरूप: एक असमान संतुलन’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में यशवंत सिन्हा, एनके सिंह और बीएल मुंगेकर जैसे वरिष्ठ सांसदों का कहना है कि आयोग का मौजूदा स्वरूप ही संघीय ढांचे की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। सिन्हा और मुंगेकर योजना आयोग के सदस्य रह चुके हैं। दोनों ने एकसुर में सुझाव दिया कि आयोग के मौजूदा स्वरूप को भंग किया जाना चाहिए।