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खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को अमेरिका नहीं देगा चुनौती

Fri, 14 Nov 2014 09:10 AM IST
नई दिल्ली/ राजीव कुमार
नई दिल्ली/ राजीव कुमार Updated Fri, 14 Nov 2014 09:10 AM IST
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US not to challenge Food security program

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को उनकी तरफ से चुनौती नहीं दी जाएगी। अमेरिका के इस समर्थन से यह माना जा रहा है कि डब्ल्यूटीओ की जनरल काउंसिल भी अमेरिका के इस प्रस्ताव को मान जाएगी।

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खाद्य सुरक्षा मसले को लेकर भारत और अमेरिका के बीच समझौते को डब्ल्यूटीओ की जनरल काउंसिल में पेश किया जाएगा। वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीद जताई है कि डब्ल्यूटीओ की जनरल काउंसिल में भी भारत के खाद्य सुरक्षा मसले पर कोई आपत्ति नहीं उठाई जाएगी।
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भारत और अमेरिका के बीच हुए इस समझौते केबाद डब्ल्यूटीओ के व्यापार सुविधा समझौते (टीएफए) को लागू करने का भी रास्ता साफ हो गया। भारत इस बात पर अडिग था कि खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और इसके बगैर भारत डब्ल्यूटीओ के व्यापार नियमों को प्रशस्त करने में अपना सहयोग नहीं देगा।
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भारत ने डब्ल्यूटीओ के कहा था कि उसे खाद्य सब्सिडी को मापने के तरीके में संशोधन करना होगा, ताकि भारत अपने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज की खरीदारी करता रहे और डब्ल्यूटीओ के नियमों की अवहेलना केबगैर उसे सस्ती दरों पर गरीबों में बेचता रहे।

सीतारमण ने कहा कि भारत कभी भी डब्ल्यूटीओ के व्यापार नियमों का विरोधी नहीं रहा है। भारत का मकसद अपने देश के किसानों केहित की रक्षा करना है।

डब्ल्यूटीओ के इंडिया एंड चैप्टर (39) में भारत ने खाद्य सुरक्षा मसले पर अपने रुख का विस्तृत विवरण दिया है और इसे अब डब्ल्यूटीओ के समक्ष रखा जाएगा। सीतारमण ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान भारत के चैप्टर 39 को लेकर दोनों देशों के बीच अच्छी सहमति बन गई थी।

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत विभिन्न देशों के बीच की व्यापार प्रणाली को हर प्रकार से अपना समर्थन देता है और इस प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए भारत कटिबद्ध है।


उन्होंने कहा कि बाली समझौते की शर्तें ठीक नहीं थी और हम उसमें संशोधन चाहते थे। हमने उस मसले को लेकर आवाज उठाई और हमें खुशी है कि वह मसला सुलझ गया। भारत ने साफ कर दिया था कि उसकी चिंताओं को दूर किए बगैर भारत व्यापार सुविधा समझौते के लिए राजी नहीं होगा।

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