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अर्थव्यवस्था में तेजी के साथ आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की चुनौती
नई दिल्ली/सुजय मेहदूदिया
Updated Wed, 18 Feb 2015 11:51 AM IST
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वित्त मंत्री अरुण जेटली आगामी 28 फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट को अंतिम रूप दे रहे होंगे। ऐसा करते हुए उनके सामने न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने की चुनौती होगी बल्कि उनको दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की चुनौती से भी जूझना होगा।
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इसके तहत जेतली को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने का रोडमैप पेश करने के साथ विवादित गार और रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स पर फैसला करना होगा। इसके अलावा वित्त मंत्री को संघ परिवार और स्वदेशी के पैरोकारों को नाराज किए बिना ‘मेक इन इंडिया ’ पहल को दिशा देनी होगी।
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अरुण जेतली के समक्ष सबसे अहम काम आर्थिक विकास को महंगाई के साथ संतुलित करते हुए निवेश चक्र को नए सिरे से तेज करना है। नरेंद्र मोदी सरकार के नौ माह के कार्यकाल में निवेश चक्र में तेजी अब तक नहीं दिखी है।
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इसके साथ वित्त मंत्री को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू निवेशकों यह भी स्पष्ट संकेत देना है कि सरकार किस तरह से श्रम सुधारों व कर सुधारों पर आगे बढ़ेगी।
इसके अलावा वित्त मंत्री के समक्ष भूमि अधिग्रहण विधेयक के संशोधनों को अमलीजामा पहनाने की भी चुनौती होगी, जिसका विरोध न सिर्फ विपक्षी दल कर रहे हैं बल्कि संघ परिवार और भारतीय जनता पार्टी समर्थित भारतीय मजदूर संघ भी इन संशोधनों के विरोध में है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय मजदूर संघ सरकार द्वारा प्रस्तावित श्रम सुधारों और भूमि अधिग्रहण संशोधनों की कड़ी मुखालफत कर रहे हैं। मेक इन इंडिया पहल के तहत अब तक घरेलू या विदेशी निवेशकों ने निवेश को लेकर कोई बड़ी घोषणा नहीं की है। ऐसे में उम्मीद है कि अरुण जेतली इस पहल को सफल बनाने के लिए नीतिगत फैसले लेेने के साथ दूसरे कई कदम उठा सकते हैं।
मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना रहा है। ऐसे में मेक इन इंडिया के लिए कर छूट और नीतिगत प्रोत्साहन की घोषणा बजट में हो सकती है। इसका मकसद आर्थिक विकास को गति देना और नौकरियां पैदा करना होगा।
राजकोषीय मोर्चे पर उम्मीद है कि वित्त मंत्री अरुण जेतली 2012 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा शुरू किए गए राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर अड़े रहे सकते हैं। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री 1 अप्रैल, 2016 से पूरे देश में जीएसटी लागू करने का रोडमैप पेश करेंगे।
वे संसद में जीएसटी विधेयक पहले ही पेश कर चुके हैं। हालांकि इसका पारित होना इस बात पर निर्भर है कि वे राज्यों को कर के संभावित नुकसान पर मुआवजा देने के अपने वादे पर किस तरह खरे उतरते हैं। इसके अलावा विवादित जनरल एंटी एवायडेंस रूल्स ( गार) पर भी वित्त मंत्री अरुण जेतली को अपना रुख साफ करना होगा।
वित्त मंत्री के लिए पेट्रोलियम, खाद्य और उर्वरक सेक्टर में दी जा रही सब्सिडी अगली प्राथमिकता हो सकती है। संभावना है कि अरुण जेतली एलपीजी और केरोसीन को नियंत्रण मुक्त कर सकते हैं और सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खाते में दी जा सकती है। इससे सब्सिडी की लीकेज और कालाबाजारी रोकने में मदद मिलेगी।