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नगदी फसलें अपना रहे हैं उत्तर प्रदेश के किसान
नई दिल्ली /ब्यूरो
Updated Sun, 10 Aug 2014 11:38 PM IST
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उत्तर प्रदेश में किसान मुख्य फसलों की खेती को छोड़ कर ज्यादा कीमत देने वाली नगदी फसलों जैसे फलों, सब्जियों और मेंथा की खेती को अपना रहे हैं।
कट्स इंटरनेशनल के एक सर्वे के मुताबिक किसानों द्वारा व्यावसायिक कृषि अपनाने से उत्पादकता और गुणवत्ता को बेहतर बनाने व खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर नई चुनौती पैदा हो रही है।
कट्स इंटरनेशनल के नीति विश्लेषक राम कुमार झा का कहना है कि किसानों में नगदी फसलों की लोकप्रियता को देखते हुए प्रदेश में उचित मार्केटिंग सुविधाओं की जरूरत है। एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) एक्ट कृषि विपणन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देता है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने बिचौलियों के दबाव के कारण इस एक्ट को नहीं अपनाया है।
ऐसे में किसानों को बेहतर कीमत ओर विपणन सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार को इस मुद्दे पर नए सिरे से विचार करना चाहिए। झा के मुताबिक पानी का बेहतर इस्तेमाल, पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना, आधुनिक व्यावसायिक ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच सुनिश्चित करना और मार्केटिंग सुविधाओं को बेहतर बनाना क्षेत्र की आर्थिक स्थिति और ग्रोथ के लिए जरूरी हैं।
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प्रभावी समावेशी विकास के लिए यह सभी अवयव अहम हैं। कट्स इंटरनेशनल जयपुर ने डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन अफेयर्स एंड ट्रेड, गवर्नमेंट ऑफ आस्ट्रेलिया के सहयोग से राज्य की कृषि-जल-ऊर्जा-बाजार सुरक्षा खास कर पूर्वी गंगा तटीय क्षेत्र की समस्याओं को जानने के लिए एक सर्वे किया है।
सर्वे के मुताबिक राज्य में मजबूत नीतियां होने के बाजवूद किसान सिंचाई के लिए समय से जल की उपलब्धता, बिजली की आपूर्ति और विपणन सुविधाओं की कमी से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा गर्मियों में भूजल की उपलब्धता के बावजूद लगभग एक तिहाई किसानों को पानी उपलब्ध नहीं होता है।
राज्य कृषि उत्पादकता कम होने, उचित ढांचागत सुविधाओं व इंडस्ट्री लिंकेज के अभाव से जूझ रहा है। राज्य के 90 फीसदी किसान छोटे किसान हैं। इनको संस्थागत कर्ज और कर्ज की सुविधा का लाभ कैसे उठाया जाए इस बारे में बहुत कम जानकारी है। ऐसे में लगभग आधे किसान ऋणग्रस्त हैं। कृषि में सरकारी खर्च में गिरावट आने से स्थिति और खराब हुई है।
उचित इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केटिंग चैनल न होना कृषि क्षेत्र की ग्रोथ में बड़ी बाधा सिद्ध हो रहा है। क्षेत्र में पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था न होने से किसानों और व्यापारियों को समय-समय पर बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ता है। 12 वीं पंचवर्षीय योजना में क्षेत्र विशेष के उत्पाद के लिए स्पेशलाज्ड सेल जैसे मध्य उत्तर प्रदेश में आलू के लिए मार्केटिंग सेंटर, मलीहाबाद में मैंगो सेंटर और बाराबंकी में मेंथा सेंटर स्थापित करने की बात कही गई है।
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कट्स इंटरनेशनल के एक सर्वे के मुताबिक किसानों द्वारा व्यावसायिक कृषि अपनाने से उत्पादकता और गुणवत्ता को बेहतर बनाने व खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर नई चुनौती पैदा हो रही है।
कट्स इंटरनेशनल के नीति विश्लेषक राम कुमार झा का कहना है कि किसानों में नगदी फसलों की लोकप्रियता को देखते हुए प्रदेश में उचित मार्केटिंग सुविधाओं की जरूरत है। एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) एक्ट कृषि विपणन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देता है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने बिचौलियों के दबाव के कारण इस एक्ट को नहीं अपनाया है।
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ऐसे में किसानों को बेहतर कीमत ओर विपणन सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार को इस मुद्दे पर नए सिरे से विचार करना चाहिए। झा के मुताबिक पानी का बेहतर इस्तेमाल, पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना, आधुनिक व्यावसायिक ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच सुनिश्चित करना और मार्केटिंग सुविधाओं को बेहतर बनाना क्षेत्र की आर्थिक स्थिति और ग्रोथ के लिए जरूरी हैं।
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प्रभावी समावेशी विकास के लिए यह सभी अवयव अहम हैं। कट्स इंटरनेशनल जयपुर ने डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन अफेयर्स एंड ट्रेड, गवर्नमेंट ऑफ आस्ट्रेलिया के सहयोग से राज्य की कृषि-जल-ऊर्जा-बाजार सुरक्षा खास कर पूर्वी गंगा तटीय क्षेत्र की समस्याओं को जानने के लिए एक सर्वे किया है।
सर्वे के मुताबिक राज्य में मजबूत नीतियां होने के बाजवूद किसान सिंचाई के लिए समय से जल की उपलब्धता, बिजली की आपूर्ति और विपणन सुविधाओं की कमी से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा गर्मियों में भूजल की उपलब्धता के बावजूद लगभग एक तिहाई किसानों को पानी उपलब्ध नहीं होता है।
राज्य कृषि उत्पादकता कम होने, उचित ढांचागत सुविधाओं व इंडस्ट्री लिंकेज के अभाव से जूझ रहा है। राज्य के 90 फीसदी किसान छोटे किसान हैं। इनको संस्थागत कर्ज और कर्ज की सुविधा का लाभ कैसे उठाया जाए इस बारे में बहुत कम जानकारी है। ऐसे में लगभग आधे किसान ऋणग्रस्त हैं। कृषि में सरकारी खर्च में गिरावट आने से स्थिति और खराब हुई है।
उचित इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केटिंग चैनल न होना कृषि क्षेत्र की ग्रोथ में बड़ी बाधा सिद्ध हो रहा है। क्षेत्र में पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था न होने से किसानों और व्यापारियों को समय-समय पर बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ता है। 12 वीं पंचवर्षीय योजना में क्षेत्र विशेष के उत्पाद के लिए स्पेशलाज्ड सेल जैसे मध्य उत्तर प्रदेश में आलू के लिए मार्केटिंग सेंटर, मलीहाबाद में मैंगो सेंटर और बाराबंकी में मेंथा सेंटर स्थापित करने की बात कही गई है।