एक नई आर्थिक मंदी की ओर दुनिया: यूएन

यूनाइटेड नेशंस/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 19 Dec 2012 09:48 PM IST
un report warns of second recession on eu, us conditions
यूनाइटेड नेशंस ने अमेरिका की सख्त वित्तीय स्थिति और यूरोपीय यूनियन के कर्ज संकट के कारण एक नई वैश्विक मंदी की चेतावनी दी है। साथ ही यूएन ने अगले दो वर्षों के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर के पूर्वानुमान को घटा दिया है। भारत के संबंध में यूएन ने साफ तौर पर कहा है कि यहां उच्च महंगाई दर और भारी राजकोषीय घाटे के चलते नीतिगत प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद कम ही रहेगी।

यूएन ने अपनी ‘विश्व आर्थिक स्थिति और पूर्वानुमान 2013’ रिपोर्ट में कहा है कि 2012 के दौरान विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर में निरंतर गिरावट आई है। इसके 2013 और 2014 में भी ‘सुस्त’ बने रहने की उम्मीद है। यूनाइटेड नेशंस ने विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर अनुमान घटाकर 2013 में 2.4 फीसदी और 2014 में 3.2 फीसदी कर दिया है। जबकि, छह माह पहले यूएन ने वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर के 2013 में 2.7 फीसदी और 2014 में 3.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।

रिपोर्ट का कहना है कि अमेरिका और यूरोप जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कमजोरी के चलते वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा सामने दिखाई दे रहा है। नौकरियों के संकट से जूझ रहे कई देशों में विकास की रफ्तार ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिए पर्याप्त आंकड़ों से दूर है। यूरो कर्ज संकट के लगातार गहराने, अमेरिका में सख्त वित्तीय स्थिति और चीन में मुश्किल आर्थिक हालातों के चलते एक नई वैश्विक मंदी का संकट खड़ा हो गया है।

अधिकांश यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएं और यूरो जोन पहले से ही मंदी की चपेट में है। यूरो जोन में बेरोजगारी का आंकड़ा इस साल रिकॉर्ड  करीब 12 फीसदी पर पहुंच गया है। यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक यूरो क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2013 में महज 0.3 फीसदी रह सकती है। 2014 में इसके मामूली रूप से सुधरकर 1.4 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान है।

भारत, चीन की रफ्तार भी रहेगी धीमी
यूएन रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया के विकास में अहम भूमिका निभाने वाली दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं भारत और चीन में भी आर्थिक सुस्ती का दौर बना रहेगा। 2011 के दौरान भारत में जहां आर्थिक वृद्धि दर 6.9 फीसदी दर्ज की गई थी। वहीं 2012 में विकास की यह रफ्तार गिरकर 5.5 फीसदी पर आ सकती है। रिपोर्ट का कहना है कि 2013 में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी पकड़ सकती है और उसकी आर्थिक वृद्धि दर 6.1 फीसदी होने की उम्मीद है। जबकि 2014 में विकास दर 6.5 फीसदी हो जाने का अनुमान है। रिपोर्ट का कहना है कि दक्षिण एशिया में 2013 के दौरान जीडीपी की वृद्धि दर औसतन 5 फीसदी रह सकती है।

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