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दो मंत्रालय करेंगे भारती-वॉलमार्ट सौदे की पड़ताल

Mon, 15 Oct 2012 08:39 PM IST
अजीत सिंह/नई दिल्ली
अजीत सिंह/नई दिल्ली Updated Mon, 15 Oct 2012 08:39 PM IST
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two ministry explores bharti walmart deal
अमेरिका की दिग्गज रिटेल कंपनी वॉलमार्ट और भारती रिटेल के बीच हुए सौदे की जांच शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) ने पूरे मामलों को नए सिरे से खंगालना शुरू कर दिया है, जबकि वाणिज्य मंत्रालय ने इस पर कॉरपोरेट मामलों से मंत्रालय की राय भी मांगी है।
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वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वाणिज्य मंत्रालय इस सौदे पर पहले भी अपनी राय दे चुका है, लेकिन निर्णायक पड़ताल कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को ही करनी है। उसी के आधार पर तय होगा कि वॉलमार्ट और भारती के बीच हुआ सौदा वैध था अथवा नहीं।
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कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के सांसद एमपी अच्युतन ने प्रधानमंत्री से इस सौदे में एफडीआई नियमों के उल्लंघन की शिकायत की थी। उनका आरोप है कि वॉलमार्ट द्वारा मार्च 2010 में कंपल्सरी कंवर्टेबल डिबेंचर्स (सीसीडी) के जरिए निवेश 456 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किया, जबकि उस समय मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई की अनुमति नहीं थी।
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इस मामले में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की भूमिका इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि निवेश कंपल्सरी कंवर्टेबल डिबेंचर्स (सीसीडी) के रूप में एक सलाहकार सेवा देने वाली कंपनी के माध्यम से हुआ। उल्लेखनीय है कि सलाहकार सेवाओं में 100 फीसदी एफडीआई की छूट है। अब पूरा मामला इस बात पर अटका है कि सीसीडी के जरिए हुए निवेश को एफडीआई माना जाए अथवा नहीं।


वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस मुद्दे पर वह कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की राय का इंतजार कर रहे हैं और उसी के आधार पर पूरी पड़ताल को अंतिम रूप दिया जाएगा। अच्युतन इस मामले को राज्यसभा में उठा चुके हैं। 7 सितंबर को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने वर्ष 2010 में वॉलमार्ट द्वारा किए 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर के निवेश को गैरकानूनी करार दिया है।
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