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गरमा सकता है डब्लूटीओ के साथ व्यापार नीति का मामला
नई दिल्ली/ राजीव कुमार
Updated Tue, 11 Nov 2014 10:08 AM IST
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खाद्य सुरक्षा के मसले पर विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के साथ चल रही खींचतान के बीच अब डब्लूटीओ के साथ व्यापार नीति का मामला भी गरमा सकता है। भारत की व्यापार नीति की समीक्षा करने के लिए डब्लूटीओ की टीम अगले सप्ताह भारत के दौरे पर आ रही है। इन दिनों वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से विदेश व्यापार नीति को अंतिम
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रूप देने की कवायद जारी है, ऐसे में डब्लूटीओ की टीम का दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक यह टीम डब्लूटीओ सचिवालय की तरफ से भेजी जा रही है। आगामी 19 से 25 नवंबर तक यह टीम भारत की व्यापार नीति की समीक्षा करेगी। टीम मुख्य रूप से इस बात की समीक्षा करेगी कि चार साल पहले भारत ने व्यापार को लेकर डब्लूटीओ से जो वादा किया था, उसे कहां तक पूरा किया गया।
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इस दौरान डब्लूटीओ की टीम वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के साथ कई अन्य मंत्रालयों के साथ भी बैठक करेगी। डब्लूटीओ की तरफ से पहले ही भारतीय निर्यातकों को मिलने वाले विभिन्न इन्सेंटिव पर आपत्ति जताई जा चुकी है। निर्यातकों के मुताबिक ऐसे में व्यापार नीति पर भी डब्लूटीओ के साथ गरमाहट हो सकती है। डब्लूटीओ की टीम इस बात पर जोर डाल सकती है कि नई विदेश व्यापार नीति में निर्यातकों को मिलने वाले इन्सेंटिव में कटौती की जाए।
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इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी) के चेयरमैन अनुपम शाह के मुताबिक ईईपीसी ने वाणिज्य मंत्रालय को साफ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर स्थानीय कारोबार प्रभावित नहीं होना चाहिए। वहीं, भारत के लिए अन्य देशों का बाजार खोला जाना चाहिए।
वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यात क्षेत्र से जुड़ी सभी काउंसिल को डब्लूटीओ की टीम के आने की जानकारी दी थी और उनके साथ होने वाली बातचीत को लेकर काउंसिल से अपनी-अपनी राय भी मांगी थी। निर्यातकों के मुताबिक भारत के कई निर्यात क्षेत्र निर्यात प्रतिस्पर्धा छूट के दायरे बाहर निकल चुके हैं। ऐसे में डब्लूटीओ की टीम उन क्षेत्र के निर्यातकों को मिलने वाली छूट पर आपत्ति जता सकती है।
मंत्रालय के मुताबिक डब्लूटीओ की टीम हर चार साल पर भारतीय व्यापार नीति की समीक्षा करती है और यह समीक्षा भी उसी का हिस्सा है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक डब्लूटीओ की टीम के साथ भारत खाद्य सुरक्षा को लेकर भी बातचीत कर सकता है, हालांकि यह टीम मुख्य रूप से व्यापार नीति की समीक्षा के लिए आ रही है।