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मुश्किल होता कारोबारी माहौल है बड़ी चुनौती: टाटा
न्यूयार्क/एजेंसी
Updated Tue, 08 Jan 2013 10:16 PM IST
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टाटा समूह से हाल ही में रिटायर हुए रतन टाटा ने कहा है कि समूह के नए अध्यक्ष साइरस मिस्त्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश का कारोबारी माहौल है। वर्तमान में देश का कारोबारी माहौल 1991 के संकट के दौर की तुलना में अधिक मुश्किल और जटिल होता जा रहा है।
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यहां एक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में रतन टाटा ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती कारोबारी माहौल को लेकर है। यह 1991 की तुलना में अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण हो गई है। 1991 में जब बाजार को खोला गया तो बहुत कम लोग सफलता हासिल करने की दौड़ में थे। आज ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है। टाटा ने अपने उत्तराधिकारी साइरस मिस्त्री के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों की बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में यह बातें कहीं। सॉल्ट से सॉफ्टवेयर बनाने वाले टाटा समूह की 21 साल तक बागडोर संभालने के बाद गत 28 दिसंबर को रतन टाटा रिटायर हो गए। साइरस मिस्त्री ने टाटा समूह के नए चेयरमैन का पद संभाला है।
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यह पूछे जाने पर कि क्या भारत में भ्रष्टाचार से निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है, टाटा ने कहा कि कुछ समय के लिए हम में से अधिकांश लोगों की खातिर यह चिंता का विषय रहा है लेकिन देश की ऊंची विकास दर और संपन्नता ने इसे ढक दिया है। टेलीकॉम सेक्टर में अनियमितता के आरोप और टाटा के लिए लॉबिंग करने वाली एक लॉबिस्ट की जांच से जुड़े पहलुओं पर टाटा ने कहा कि जांच एजेंसियों ने न केवल समूह को दोषमुक्त बताया है बल्कि सभी टेलीकॉम कंपनियों के बीच कम सुविधा वाली कंपनी पाया।
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जहां तक टेप किए गए फोन कॉल की बात है तो जाहिर तौर पर फोन कॉल किए गए थे, जो निश्चित रूप से किसी को हानि पहुंचाने वाले नहीं थे। हमने कुछ भी गलत और गैर कानूनी कार्य नहीं किया। इसलिए मैंने कोई अलग काम नहीं किया। टाटा समूह के चेयरमैन पद से रिटायर होने के बाद अपनी अनुभूति के बारे में उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। अब मेरे पास उन कार्यों को करने के लिए समय है, जिन्हें मैं करना चाहता था।’ रिटायरमेंट की बाद की योजना के बारे में उन्होंने कहा कि वह बहुत अधिक योजना बनाने की कोशिश नहीं रहे हैं। बहुत लंबे समय बाद अवसर मिला है कि स्वयं को समय दे सकूं।