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रिलायंस पर सरकार की 'मेहरबानी' पर सवाल

Sat, 23 Aug 2014 08:49 PM IST
Updated Sat, 23 Aug 2014 08:49 PM IST
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tmc leader raise question against modi government judgement

पेट्रोलियम सेक्टर की सरकारी कंपनी ओएनजीसी द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज पर केजी बेसिन स्थिति ओएनजीसी के गैस क्षेत्र से अवैध रूप से गैस निकालने के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है।

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रिलायंस के खिलाफ ओएनजीसी की शिकायत को आधारहीन बताते हुए सरकार की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा लगाए जाने पर राज्यसभा सांसद तपन सेन ने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर सवाल उठाया है।
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पत्र में सेन ने कहा है कि ओएनजीसी सरकार की महारत्न कंपनी है। देश में तेल और गैस की खोज को लेकर ओएनजीसी की काफ अच्छी साख है। ऐसे में रिलायंस के खिलाफ उसकी शिकायत अवश्य ही तकनीकी कारकों पर आधारित रही होगी।
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ऐसे में मैं जानना चाहता हूं कि किस आधार पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ओएनजीसी की शिकायत को आधारहीन आरोप करार दिया है। क्या ऐसा करने से पहले ओएनजीसी के आरोप की तकनीकी आधारों पर जांच कराई गई थी। यदि हां, तो मंत्रालय ने किस एजेंसी से यह जांच कराई थी।

'ओएनजीसी पर लगे आरोप नहीं है सही'

tmc leader raise question against modi government judgement

इसके साथ ही सांसद ने इस मामले में मंत्रालय द्वारा खुद ओएनजीसी के ही सुस्त पड़े रहने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक न रहने की बात कहे जाने पर भी सवाल उठाया है।

उन्होंने मंत्रालय के इस रुख को गलत बताते हुए कहा है कि ओएनजीसी मामले से संबंधित केजी-डीडब्ल्यूएन-98/3, जी-4 गोदावरी और केजी डीडब्ल्यूएन-98/2 से जुड़ा भूगर्भीय और भू-भौतिक (जियोफिजिकल) डेटा मंत्रालय और हाइड्रोकार्बन निदेशालय (डीजीएच) को बराबर भेजती रही है।

ऐसे में ओएनजीसी के सुस्त रहने या पर्याप्त रूप से सचेत न रहने की बात किस आधार पर कही जा सकती है। सेन का कहना है कि इस सबके बावजूद अगर ओएनजीसी द्वारा सुस्ती बरतने की बात मान भी ली जाए, तो किसी निजी कंपनी द्वारा उसके क्षेत्र से गैस निकाले जाने को किस तरह औचित्यपूर्ण माना जा सकता है। तपन सेन ने पेट्रोलियम मंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

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