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सरकार को आगे बढ़ाने होंगे वित्तीय सुधार
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
Updated Mon, 13 Apr 2015 09:30 PM IST
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मोदी सरकार ने देश के वित्तीय घाटे को काबू में लाने और पेट्रोलियम सेक्टर में महत्वपूर्ण सुधारों जैसे कई कदम उठाए हैं, पर आर्थिक सुधारों को अभी और आगे बढ़ाने की जरूरत है। ऐसा न होने पर वित्तीय या कमोडिटी बाजार का कोई बड़ा झटका देश के आर्थिक परिदृश्य को बिगाड़ सकता है। इससे न केवल सरकार के अब तक के आर्थिक कदमों को झटका लग सकता है, बल्कि देश की मौद्रिक साख भी प्रभावित हो सकती है। यह बात ग्लोबल रेटिंग एजेंसी स्टेंडर्ड एंड पुअर (एसएंडपी) ने अपनी एक रिपोर्ट में कही है।
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एसएंडपी ने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाए जाने की जोरदार वकालत करते हुए कहा है कि सुधारों को आगे न बढ़ाया गया, तो सरकार को निवेश में बढ़ोतरी कर पाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। एसएंडपी ने यह बात देश के वित्तीय क्षेत्र और आधारभूत संरचना क्षेत्र (इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर) पर ‘इंडियाज फिसकल रोड ब्लॉक्स कुड स्टॉल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोग्रेस’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कही है। एसएंडपी के एनालिस्ट किम एंग का कहना है कि नए आर्थिक सुधारों के बिना सरकार निवेश में तेजी को आगे जारी नहीं रख सकेगी।
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ढांचागत वित्तीय कमजोरियां भारत की मौद्रिक साख को अस्थिर बनाए रख सकती हैं। एसएंडपी ने सब्सिडी को देश की वित्तीय स्थिति में कमजोरी का मुख्य कारण बताया है। एजेंसी ने कहा है कि 2014 में ईंधन सब्सिडी की दिशा में किए गए सुधार के बावजूद यह चिंता का विषय बनी हुई है।
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इसके अलावा सरकार के कर्ज भी आर्थिक स्थिति के लिए एक चुनौती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के बजटीय प्रदर्शन में हाल के वर्षों में सुधार देखने को मिला है, पर वित्तीय या कमोडिटी बाजार के किसी झटके से मुश्किल से अर्जित किए गए वित्तीय सुधारों को झटका लग सकता है। टैन ने कहा कि बजटीय खर्चों में कमी लाना यह दर्शाता है कि वित्तीय सुधार सरकार की उच्च प्राथमिकताओ में शामिल हैं। सरकार का यह रुख देश की मौद्रिक रेटिंग के लिहाज से भी सकारात्मक है। हालांकि ब्याज दरों में अनपेक्षित रूप से कोई बड़ी बढ़ोतरी देश के बजटीय खर्चों में बढ़ोतरी कर सकती है।
गौरतलब है कि अमेरिका स्थित एसएंडपी ने भारत को ट्रिपल बी की रेटिंग दे रखी है और देश के आर्थिक परिदृश्य को स्थिर श्रेणी में रखा है। यह ध्यानपूर्वक निवेश की स्थिति को दर्शाता है और बेकार (जंक) स्तर की रेटिंग से महज एक पायदान ऊपर है।
पिछले सप्ताह रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत के क्रेडिट आउटलुक को बढ़ाकर पॉजिटिव कर दिया है। इससे मूडीज द्वारा अगले 12 से 18 महीने में देश की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाए जाने की उम्मीद जगी है। इसके अलावा एक अन्य रेटिंग एजेंसी फिच ने भी आर्थिक विकास में तेजी की उम्मीद जताई है।