'अबकी बार, मोदी सरकार' का नारा देने वाले फिर चर्चा में
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स्पाइसजेट के प्रमोटर्स में से एक अजय सिंह इस समय चर्चाओं में हैं। इनकी चर्चा दो कारणों से हो रही है। अजय सिंह बहुत जल्द स्पाइसजेट को खरीदने जा रहे हैं, जिसने अजय सिंह को चर्चाओं में ला दिया है।
वहीं दूसरी ओर, ये वही शख्स हैं, जिन्होंने 2014 चुनाव के दौरान मोदी सरकार को 'अब की बार, मोदी सरकार' का सबसे चर्चित स्लोगन दिया था।
आपको बता दें कि अजय सिंह ने आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई की है। इन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एमबीए भी किया है और एक बार दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के डायरेक्टर भी रह चुके हैं।
काफी उत्साहित हैं अजय सिंह
स्पाइसजेट के मौजूदा प्रमोटर कलानिधि मारन ने एयरलाइन को अजय सिंह को बेचने का फैसला कर लिया है। अजय सिंह अमेरिका की जे पी मॉर्गन कंपनी के साथ मिलकर स्पाइसजेट में करीब 1500 करोड़ रुपए निवेश कर रहे हैं।
इस डील को लेकर अजय सिंह काफी उत्साहित हैं और उन्हें भरोसा है कि वह इंडिगो और जेट एयरवेज की मोनोपोली को तोड़ने में कामयाब होंगे।
अजय सिंह के करीबी ने बताया कि मुनाफा कैसे कमाते हैं, ये अजय सिंह पहले ही दिखा चुके हैं। जब उन्होंने स्पाइसजेट को छोड़ा था तो इस एयरलाइन कंपनी के पास कुल 800 करोड़ रुपए का कैश रिजर्व था।
सारी हिस्सेदारी बेचेंगे मारन
कालनिधि मारन के सन ग्रुप की इस एयरलाइन कंपनी में कुल मिलाकर 58.46 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। मारन अपनी ये सारी हिस्सेदारी अजय सिंह को बेच रहे हैं और सिर्फ वारंट (जिसे 10 प्रतिशत हिस्सेदारी में बदला जा सके) के साथ इस एयरलाइन में एक निवेशक रहेंगे।
स्पाइजेट ने अभी यह नहीं बताया है कि यह डील कितने रुपए में हो रही है। हालांकि, आपको बता दें कि मारन की कुल हिस्सेदारी करीब 500 करोड़ रुपए है, लेकिन एयरलाइन पर 700 करोड़ रुपए का बकाया है, जो सन ग्रुप ने चुकाने से मना कर दिया है।
ये है स्पाइसजेट का सफर
1993- एस के मोदी ने लुफ्थांसा एयरलाइन के साथ मिलकर मोदीलुफ्ट नाम की एयरलाइन कंपनी स्टार्ट की। इस कंपनी की उड़ानें 1996 में बंद हो गईं। इसके बाद मोदी ने इस एयरलाइन को यूके के भुलो कांगसाग्रा परिवार को बेच दी।
2004- अजय सिंह ने इस एयरलाइन कंपनी में निवेश किया।
2005- कांगसाग्रा और सिंह ने मिलकर मोदीलुफ्ट का नाम बदलते हुए स्पाइसजेट नाम से इस एयरलाइन कंपनी को लॉन्च किया।
2008- कांगसाग्रा ने अमेरिका के एक निवेशक विलबर रोज को अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जिसके हाथ में इस एयरलाइन की कमान चली गई।
2010- रोज और अजय सिंह ने कलानिधि मारन को अपनी हिस्सेदारी बेच दी।
2015- कलानिधि मारन अपनी हिस्सेदारी अजय सिंह को बेच रहे हैं।