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पोस्ट ऑफिस नहीं, ये है इंडिया पोस्ट बैंक!

Fri, 04 Apr 2014 05:07 PM IST
Updated Fri, 04 Apr 2014 05:07 PM IST
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this is not post office it is india post bank!

इंडिया पोस्ट को बैंकिंग लाइसेंस मिलने की आसार बढ़ गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बुधवार को इंडिया पोस्ट के लाइसेंस पर अलग से विचार करने की घोषणा के बाद, वित्त मंत्रालय का भी रुख इंडिया पोस्ट को लेकर बदल सकता है।

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वित्त मंत्रालय इस संबंध में नए सिरे से प्रस्ताव पर विचार करने की तैयारी में है। इंडिया पोस्ट को बैंक लाइसेंस देने का वित्त मंत्रालय शुरू से विरोध कर रहा था। इसकी वजह से ही रिजर्व बैंक ने भारत सरकार से फिर से इंडिया पोस्ट के आवेदन पर विचार करने की बात कही है।

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आरबीआई ने कहा लाइसेंस देने के लिए

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वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार रिजर्व बैंक द्वारा लाइसेंस के लिए फिर से चर्चा करने के संकेत देने के बाद पूरे आवेदन को नए सिरे से देखा जाएगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि आरबीआई के रुख से साफ है कि वह इंडिया पोस्ट के आवेदन को लेकर अलग नजरिया रखता है। ऐसे में वित्त मंत्रालय अपने पहले के रुख पर फिर से विचार करेगा।

अधिकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय के विरोध का कारण प्रमुख रूप से यह था कि एक और सरकारी बैंक के खुलने से सरकार को उसे पूंजी सहायता मुहैया करानी होगी। इंडिया पोस्ट की वित्तीय स्थिति को देखते हुए उसे कम से कम 500 करोड़ रुपये की पूंजी सहायता देनी होगी।

इस मामले में एंजेल ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट वैभव अग्रवाल ने कहा कि रिजर्व बैंक के रुख से साफ है वह इंडिया पोस्ट को लाइसेंस देना चाहता है। ऐसे में वह चुनाव बाद बनने वाली नई सरकार के रुख को भी देखना चाहता है।

प्रणव मुखर्जी ने दिया था जोर

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साल 2010-11 में बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि नए बैंक लाइसेंस देने का उद्देश्य वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को पूरा करना है।

रिजर्व बैंक ने भी इसीलिए बैंकों के निर्देश में यह प्रावधान किया है कि वह 25 फीसदी शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में खोलें। इंडिया पोस्ट के देश भर में 1.54 लाख पोस्ट ऑफिस हैं।

खास बात यह है कि इसमें से 90 फीसदी पोस्ट ऑफिस ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इसके अलावा 2.69 लाख ग्रामीण डाक सेवक हैं, जो कि लोगों के घरों तक जाकर वित्तीय सेवाएं देते हैं। ऐसे में इंडिया पोस्ट को लाइसेंस मिलने से एक ऐसे तबके तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा, जहां बैंकिंग सेवाएं नहीं हैं।

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