फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   the women club who challenge to men

महिलाओं के ये क्लब मर्दों को देंगे चुनौती

Fri, 07 Aug 2015 06:48 PM IST
Updated Fri, 07 Aug 2015 06:48 PM IST
विज्ञापन
the women club who challenge to men

दुनिया भर में इन दिनों स्टार्ट अप की धूम है लेकिन समाज और उद्योग के कई और क्षेत्रों की तरह, दबदबा यहां भी पुरुषों का ही है। विश्वविद्यालयों में इंडीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की बहुत ही कम संख्या के कारण तकनीकी और स्टार्ट अप का क्षेत्र 'ब्वायज क्लब' जैसा बन गया है।

विज्ञापन


एडिनबरा यूनिवर्सिटी के दो साल के अध्ययन में पाया गया कि इन कोर्सों में दाखिला लेने वाली महिलाओं की संख्या या उसी स्तर पर अटकी हुई है या फिर गिर रही है।
विज्ञापन


अमेरिका में तो 1980 के दशक के मुकाबले कंप्यूटर साइस पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या खासी गिरी है।महिलाओं के बारे में पुराने, रूढ़िवादी विचारों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सिलिकन वैली में विमेंस स्टार्टअप लैब की संस्थापक एरी होरई बताती हैं कि स्टार्ट अप इकोसिस्टम में ही नहीं, बल्कि अन्य कारोबारी जगत में भी सफलता का मॉडल जैसे पुरुषों के लिए ही बना हुआ है।

वो बताती हैं, "सफलता का मॉडल है- काम के ज्यादा घंटे, नेटवर्किंग के लिए शाम को शराब पीने पिलाने का दौर, और गॉल्फ कोर्स में लंबी बातचीत के दौर से बनता विश्वास का रिश्ता...महिलाओं को ऐसे सफलता के मॉडल का नुकसान होता है क्योंकि वो इन रास्तों को नहीं अपना सकती हैं। लिहाजा महिलाएं कामयाबी के दूसरा विकल्प अपना रही हैं।"इसीलिए इस क्षेत्र में बदलाव की बयार आ रही है।

ऐसा संभव हो रहा है 'ऑल गर्ल्स क्लब' के जरिए, यानी महिलाओं के वो ग्रुप्स और कंपनियां जिन्हें महिलाएं चलाती हैं और जिनसे और महिलाओं को इस क्षेत्र में नए-नए अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं।

महिलाओं की भागीदारी कम

the women club who challenge to men

फार्चून पत्रिकार के मुताबिक अमेरिका में एक अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार करने वाली यूनिकार्न कंपनियों के बोर्ड रूम में महज 6।2 प्रतिशत डायरेक्टर ही महिलाएं हैं।

बैबसन कॉलेज के एक अध्ययन के मुताबिक अमेरिकी वेंचर कैपिटल फर्म्स में 2014 में महिला साझेदार महज़ 6 फ़ीसदी थी। यह संख्या 1999 में 10 फीसदी से गिरी है।

अमेरिकी के तकनीकी और स्टार्ट अप हब सिलिकन वैली में तकनीकी स्टार्टअप्स में कार्यकारी पदों पर केवल 11 प्रतिशत ही महिलाएँ हैं।

वैसे ये केवल अमेरिका की तस्वीर नहीं है। 2012 में ऑस्ट्रेलिया में डिलॉइट फर्म के एक अध्ययन के मुताबिक 1000 तकनीकी स्टार्ट अप में केवल 4।3 प्रतिशत की संस्थापक सदस्य महिलाएं हैं।

इसराइल के सेंट्रल ब्यूरो ऑफ स्टैटिसटिक्स के मुताबिक तकनीकी कंपनियों के संस्थापकों में महिलाओं की संख्या 10 फीसदी से कम है।

फेलेना हेनसन हेरा हब की संस्थापिका हैं वैसे वायरा एक्सलरेटर्स के सर्वे के मुताबिक लंदन में तकनीकी कंपनियों के प्रमोटरों में 30।3 फीसदी महिलाएं हैं।

क्या है 'गर्ल्स क्लब' की भूमिका?

the women club who challenge to men

तकनीकी स्टार्ट अप और कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के जो प्रयास हो रहे हैं। ऐसा जिन संस्थाओं और कंपनियों के ज़रिए हो रहा है, उन्हें 'ऑल गर्ल्स क्लब' कहा जा रहा है।

ये वो कंपनियां और स्टार्ट अप हैं जिन्हें महिलाएं शुरू कर रही हैं। इनमें महिलाओं को ज्यादा काम मिल रहा है। इन कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के लिए भी महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि यहां पुरुषों का विरोध होता है, लेकिन महिलाओं द्वारा शुरू किए गए इन स्टार्ट अप में ऊपर से नीचे तक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। महिलाएं भी एक दूसरे को मौके देकर और उनके बारे में बताकर इस प्रक्रिया को आगे बढा रही हैं।

कैसे चलता है गर्ल्स क्लब?

the women club who challenge to men

इस तरह का पहला महिलाओं का नेटवर्क (नॉन प्राफ‌िट प्लेटफॉर्म) स्प्रिंग बोर्ड इंटरप्राइजेज था। इसके कार्यक्रम 2000 के दशक से अमेरिकी शहरों में चल रह हैं।

इन कार्यक्रमों में 500 से ज्यादा उद्यमी शामिल थे और इन्होंने 6।5 अरब डॉलर जुटाए थे। इसके बाद इसी संस्थान ऑस्ट्रेलिया में लाँच किया गया।

विमेंस स्टार्ट अप लैब भी महिलाओं के नेतृत्व वाले वेंचर के लिए काम करता है। होरी के मुताबिक इन नेटवर्क्स के उद्देश्यों हैं-ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को शामिल करें, केवल शीर्ष पर पहुंची हुई महिलाओं की ही मदद नहीं..

इस कार्यक्रम में कंपनी की ग्रोथ के बारे में तैयारी की जाती है और उसे हासिल करने के लिए हरसंभव मदद दी जाती है। संभावित निवेशकों और बिज़नेस मेंटॉर के साथ उनकी मुलाकात सुनिश्चित की जाती है।

2004 में जेंडर मेडिसीन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक कामकाजी माहौल में महिलाएं आपसी संबंध, सम्मान, समानता और सहयोग को ज्यादा महत्व देती हैं।जबकि पुरुष वेतन, पैसा, सुविधाएं और पावर पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

सिंगापुर में ऐसा प्लेटफॉर्म है वूल्फ वर्क्स, जिसमें केवल महिलाएं काम कर रही हैं। यह वर्जीनिया वूल्फ की 'ए रूम ऑफ वन्स ओन' से प्रभावित है और इसकी शुरुआत 2014 में हुई थी।

इसी तरह का एक और प्लेटफॉर्म है 'शी विल शाइन एचक्यू हब।' यह मेलबर्न में स्थित है। इसकी शुरुआत 2014 में हुई थी। यह केवल महिलाओं वाले कारोबारी समूह को वर्कशाप मुहैया कराते हैं।

2009 में स्थापित हेरा हब इसी तरह से अमेरिका के सैन डियागो से लेकर वाशिंगटन डीसी तक में महिलाओं के साथ काम कर रहा है। यहां पुरुषों पर पाबंदी तो नहीं है, लेकिन फेलेना हेनसन ने इसे महिला प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए शुरू किया था।

हेनसन मानती हैं कि कामकाजी माहौल ऐसा होना चहिए जिसमें आगे बढ़ने के लिए आपको किसी दूसरे को धक्का देने की जरूरत नहीं हो। हेनसन कहती हैं, "महिलाएं एक दूसरे की मदद करती हैं। वह कहीं ज्यादा बेहतर ढंग से नेटवर्किंग करने में कामयाब होती हैं।"

दुनिया के कई देशों में पहुंच

the women club who challenge to men

हेरा हब अब सऊदी अरब और दूसरी जगहों पर विस्तार की योजना बना रहा है। सऊदी अरब के संभावित साझेदारों ने हेनसन से कहा कि वहां पुरुषों और महिलाओं के बीच सामाजिक अलगाव के चलते महिलाओं के समूह में ही महिलाएं काम कर सकती हैं।

इसराइल के तेल अवीव में वीएमएन इसी तरह का वर्क हब है। मार्च 2015 में उद्यमी ओरेन मेराव ने इसे शुरु किया था। उन्होंने अपने वर्क हब के बारे में कहा, "हम महिला उद्यमियों के पास पहुंच रहे हैं। मैं महिलाओं के शुरु किए गए वेंचर पर ज्यादा ध्यान दे रही हूं। हमारे वर्क स्पेस में महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी 50-50 फीसदी है।"

फोलोन फातेमी गूगल में सबसे कम उम्र की महिला कर्मचारी थीं। उन्हें महज 19 साल में गूगल की नौकरी मिल गई थी। उन्होंने नोड नाम से अपना स्टार्ट अप शुरू किया। इस स्टार्ट अप का उद्देश्य है कि उन महिलाओं को जोड़ा जाए जिन्हें जोड़ने की जरूरत है।

फातेमी मानती हैं कि महिलाओं को लेकर होने वाली पहल, लैंगिक मुद्दों पर जागरुकता और महिला उद्यमियों के लिए फंड की व्यवस्था करेगी। हालांकि वे इस दौरान 'अस वर्सेज दैम' यानी पुरुष बनाम महिला की मानसिकता से बचने की सलाह भी देती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed