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बिजली ट्रांसमिशन के उपाय पर पावरग्रिड का फ्लॉप शो

Sun, 10 Aug 2014 09:10 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sun, 10 Aug 2014 09:10 PM IST
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The flop show of PowerGrid's measure on power transmission

बिजली संकट से जूझ रहे देश में जहां बिजली उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है, वहीं मौजूदा बिजली का ट्रांसमिशन करने के लिए भी पर्याप्त उपाय नहीं किए जा रहे हैं।

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देश में ग्रिड के जरिए बिजली ट्रांसमिशन करने का काम करने वाली कंपनी पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने बिजली वितरण सुधारने के लिए चार साल से गठित फंड का इस्तेमाल नहीं किया है। जिससे देश में बिजली ट्रांसमिशन को लेकर कंजेसन (अवरोध) बढ़ा है। साथ ही पावर ग्रिड की मौजूदा लाइन भी बेहतर मैकेनिज्म न होने की वजह से अपनी क्षमता का औसतन 0-30 फीसदी ही इस्तेमाल कर रही है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
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कैग की रिपोर्ट के अनुसार सीईआरसी के तहत साल 2010 में गठित किए गए पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड (बिजली प्रणाली विकास फंड) में दिसंबर 2013 तक 6,301 करोड़ रुपये पड़े थे, लेकिन इसका इस्तेमाल पीजीसीआईएल ने नहीं किया है। अगर पावर ग्रिड ने इस फंड का इस्तेमाल किया होता, तो देश में काफी हद तक ग्रिड के जरिए बिजली के ट्रांसमिशन को बेहतर किया जा सकता था। ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल भी यह बात कह चुके हैं कि बिजली ट्रांसमिशन के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। उनके अनुसार आपात स्थिति में बिजली ट्रांसमिशन के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है।
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ऐसे में कैग की रिपोर्ट इस दिशा में ढीले रवैये को साफ तौर से सामने लाती है। कैग के अनुसार डेवलपमेंट फंड का गठन बिजली वितरण में कंजेशन को दूर करने, विशेष सुरक्षा स्कीम के इंस्टॉलेशन, वीएआर कंपनसेंटर, शंट कैपेसिटर को लगाने के लिए किया गया था। इनके जरिए पावर ग्रिड अतिरिक्त बिजली वितरण की क्षमता को विकसित कर सकता था लेकिन इस पूरे फंड का इस्तेमाल नहीं किया गया।


कैग के अनुसार पावर ग्रिड इसके अलावा बिछाई गई ट्रांसमिशन लाइन के बेहतर इस्तेमाल के लिए कोई मैकेनिज्म विकसित नहीं कर सका है। जिसके कारण बिजली वितरण में कंजेसन (अवरोध) और ट्रांसमिशन आदि की समस्याएं बढ़ी हैं। कैग की यह रिपोर्ट साल 2007-12 की अवधि में की गई जांच के आधार पर तैयार की गई है। कैग के अनुसार कुछ ट्रांसमिशन लाइन को छोड़कर औसत इस्तेमाल केवल 0-30 फीसदी हुआ है। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 40 अंतर क्षेत्रीय बिजली लाइन में से 33 लाइन में औसतन 0-30 फीसदी इस्तेमाल हुआ है।

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