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कपड़ा उद्योग ने की उत्पाद शुल्क घटाने की मांग

Tue, 08 Jan 2013 10:11 PM IST
नई दल्ली/एजेंसी
नई दल्ली/एजेंसी Updated Tue, 08 Jan 2013 10:11 PM IST
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textiles industry seeks cut in excise duty on man made fibres

कपड़ा उद्योग ने सरकार से राहत की मांग करते हुए आगामी बजट में हस्त निर्मित धागों (मैन मेड फाइबर) पर उत्पाद शुल्क घटाकर 8 फीसदी करने की गुहार लगाई है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री (सीआईटीआई) ने मंगलवार को वित्त मंत्री पी चिदंबरम को अपना बजट पूर्व प्रत्यावेदन सौंपते हुए मैन मेड फाइबर और उसके कच्चे माल पर उत्पाद शुल्क 12 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी करने की मांग की है।

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फेडरेशन ने कहा कि शुल्क घटाने से सरकार के राजस्व में कोई कमी नहीं होगी क्योंकि इससे मांग में इजाफा होगा और उत्पादन बढ़ने से राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। संगठन का कहना है कि चीन में कपड़े की उत्पादन लागत बढ़ने के बाद भारत के कपड़ा उद्योग के लिए ग्लोबल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए काफी मजबूत संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में सरकार अगर शुल्क में कटौती करती है, तो कपड़ा उद्योग के विकास में यह कदम काफी सहायक साबित होगा।
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इसके साथ ही संगठन ने सरकार से कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए सेवा कर से मुक्ति की मौजूदा 15 लाख रुपये की सीमा को घटाकर 10 रुपये करने व टेक्सटाइल सेक्टर के लिए सेवा कर को मौजूदा 12 फीसदी से घटाकर 10 करने की मांग की है। इसके अलावा वस्त्र उद्योग की हालत सुधारने के लिए ब्रांडेड परिधानों पर 8 फीसदी के वैकल्पिक शुल्क (ऑप्सशनल ड्यूटी) की जगह 12 फीसदी आवश्यक शुल्क (मेंडेटरी ड्यूटी) लगाने का भी सुझाव सरकार को दिया गया है।
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इसके साथ ही देश से कपड़े के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार को सुझाव दिया गया है कि ब्याज दर के मामले में कपड़ा उद्योग द्वारा लिए जाने वाले निर्यात ऋण (एक्सपोर्ट क्रेडिट) को प्राथमिकता वाले सेक्टरों द्वारा लिए जाने वाले निर्यात शुल्क की तरह मानते हुए इसमें भी राहत की मांग की गई है।


इस बारे में तर्क देते हुए फेडरेशन ने कहा कि देश का कपड़ा उद्योग आधरभूत ढांचे और उत्पादन लागत के मामले में इस समय विदेशी वस्त्र उद्योगों की अपेक्षा बुरी स्थिति में है ऐसे में वाजिब दरों पर निर्यात ऋण की उपलब्धता ऐसी समस्याओं का सामना करने में उद्योग के लिए मददगार साबित होगी। गौरतलब है कि नाजुक आर्थिक हालात के चलते अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में मांग में कमी के चलते अप्रैल से सितंबर 2012 की तिमाही में देश से कपड़ों का निर्यात 5.9 फीसदी घटकर 14.1 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया।

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