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स्लम एरिया में 10 फीसदी परिवारों के पास कंप्यूटर

Thu, 21 Mar 2013 11:58 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 21 Mar 2013 11:58 PM IST
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ten percent families of slum areas have computers

देश की करीब 6.8 करोड़ आबादी ऐसे गंदगी भरी और बुनियादी सुविधाओं से वंचित इलाकों में रहने को मजबूर है, जिन्हें सरकार झुग्गी बस्ती या स्लम मानती है। लेकिन विरोधाभास देखिए, जिन बस्तियों के एक तिहाई परिवार खुले में शौच करने को मजबूर हैं, वहां 10 फीसदी परिवारों के पास कंप्यूटर या लैपटॉप हैं।

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करीब 72 फीसदी परिवारों के पास मोबाइल फोन और टीवी है लेकिन पीने का पानी सिर्फ 56 फीसदी परिवारों को मुहैया है। वर्ष 2011 की आवास गणना के आधार पर गृह मंत्रालय ने झुग्गी बस्तियों की स्थिति पर रिपोर्ट जारी की है।
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केंद्रीय आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री अजय माकन ने बृहस्पतिवार को यह रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि वर्ष 2001 में शहरों की करीब 23.5 फीसदी आबादी स्लम में रहने को मजबूर थी, अब यह घटकर 17.4 फीसदी रह गई है।
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आंकड़ों में भले ही स्थिति सुधरती दिख रही हो, लेकिन हकीकत में हालात काफी खराब है। आज देश के एक करोड़ 37 लाख परिवार स्लम में रहने को मजबूर हैं।

देश के 19 महानगर ऐसे हैं, जहां 25 फीसदी से ज्यादा लोग मलिन बस्तियों में रहते हैं। इनमें मुंबई, मेरठ, जबलपुर, विजयवाड़ा और विशाखापट्टम की स्थिति और भी ज्यादा खराब है। यहां की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी झुग्गियों में रहती है।


झुग्गी बस्ती की सरकारी परिभाषा
मैदानी इलाकों में बेहद गंदगी के बीच घने बसे 20 से ज्यादा परिवारों वाली बसावट को स्लम माना जाता है जो अस्थायी रूप से बसे कच्चे मकानों में पेयजल व साफ-सफाई की बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए यह सीमा 10 से 15 परिवारों की है।

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