टेलीकॉम कंपनियां स्पेक्ट्रम को कर सकेंगी साझा
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जिसका फायदा ग्राहकों को बेहतर सर्विस और टैरिफ दरों में कमी के रूप में मिल सकता है। ट्राई की सिफारिशों पर अंतिम फैसला अब डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम करेगा। जिसके बाद अंतिम गाइडलाइन जारी होगी।
ग्राहकों को मिलेगी बेहतर सर्विस सोमवार को ट्राई ने स्पेक्ट्रम साझा करने के संबंध में गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत ट्राई ने कहा है कि कंपनियां सभी तरह के स्पेक्ट्रम को साझा कर सकेगी। हालांकि इसके तहत कंपनियां केवल उन्हीं सर्किल में स्पेक्ट्रम की साझेदारी कर सकेंगी, जहां पहले से उनके पास स्पेक्ट्रम का लाइसेंस होगा। ट्राई के इस कदम से कंपनियां 2जी, 3जी और 4जी स्पेक्ट्रम को साझा कर सकेंगी।
ट्राई के अनुसार एक बैंड में स्पेक्ट्रम होल्डिंग सीमा 50 फीसदी और पूरे सर्किल के लिए 25 फीसदी होल्डिंग सीमा होगी। इसके अलावा ट्राई ने स्पेक्ट्रम साझा करने पर 0.5 फीसदी स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज लगाने की भी सिफारिश की है। ट्राई के इस कदम से स्पेक्ट्रम की कमी से जूझ रही कंपनियों को फायदा मिलेगा। इसका फायदा खास तौर एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया जैसी बड़ी कंपनियों को अपनी सेवाओं में विस्तार करने में मिलेगा। वहीं छोटी कंपनियां जो स्पेक्ट्रम होने के बाद भी सेवाओं का विस्तार नहीं कर पा रही है, वह साझेदारी के जरिए पूंजी जुटा सकेंगी।
हालांकि ट्राई ने इंडस्ट्री की एक प्रमुख मांग को स्वीकार नहीं किया है। ट्राई ने कंपनियों को स्पेक्ट्रम किराए पर देने की सिफारिश नहीं की है।जीएसएम सेवाएं देने वाली कंपनियों के संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यू ने ट्राई की सिफारिशों का स्वागत किया है। उनके अनुसार इस कदम से कंपनियों को फायदा मिलेगा। साथ ही ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा सरकार की आय में बढ़ोतरी होगी। हालांकि सिफारिशों में एसयूसी चार्ज पर हमें थोड़ी निराशा हुई है।