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बजट से करों में स्थिरता की आस

Wed, 09 Jul 2014 10:19 PM IST
ए. दीदार सिंह, महासचिव, फिक्की
ए. दीदार सिंह, महासचिव, फिक्की Updated Wed, 09 Jul 2014 10:19 PM IST
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taxes Stability hope around in budget

आम बजट का बेसब्री से इंतजार है। नई सरकार का यह पहला बजट है और इसमें आने वाले समय में सरकार के नीतियों की झलक दिखाई देगी। भारत की जीडीपी पिछले दो वर्षों से 5.0 फीसदी के दायरे में रही है और यह बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है कि हम अपनी क्षमता के मुताबिक वास्तविक विकास दर हासिल करें। हमें उम्मीद है कि बजट से आर्थिक मजबूती, सरकारी खर्चों के बेहतर इस्तेमाल और नीतिगत प्रावधानों के साथ गैर विरोधात्मक कर प्रणाली के संदर्भ में ठोस संकेत दिखाई देंगे।

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भारत की राजकोषीय और आर्थिक स्थिति पिछले कुछ वर्षों में तेजी से कमजोर हुई है। ऐसे में वित्तीय मजबूती दोबारा हासिल करना नितांत आवश्यक है। हमारा सब्सिडी बिल अप्रत्याशित रूप से काफी बढ़ चुका है और हम ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहां अब इस बोझ को और नहीं बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, पिछले दो वित्तीय वर्षों में योजनागत खर्चों में कटौती की गई, जिसका प्रतिकूल असर उत्पादक क्षमता पर हुआ है। वित्तीय समझदारी यही कहती है कि हमें आमदनी और खर्च का प्रभावकारी प्रबंधन तैयार करना चाहिए।
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इसके अलावा, बजट से टैक्स प्रणाली में स्थिरता लाने के संबंध विशेष पहल किए जाने की उम्मीद है। टैक्स संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए हमें स्पष्ट कदम उठाने की जरूरत है। निवेशकों का भरोसा मजबूत करने के लिए आसान टैक्स नियमों व टैक्स प्रणाली की आवश्यकता है। इसके साथ ही विवादों का निपटारा एक तय समय में हो जाए, हमें ऐसी व्यवस्था लानी होगी। इससे सरकार को जहां अच्छी खासी आमदनी हो सकती है, वहीं करदाताओं के लिए अनिश्चितता की स्थिति कम होगी।
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सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि पूर्व प्रभावी कानून एक दुर्लभ अपवाद हैं और यह हमेशा करदाताओं के पक्ष में होने चाहिए। ऐसे प्रावधानों ने निवेश के माहौल को काफी बिगाड़ा है। अब इन प्रावधानों के समीक्षा की जरूरत है।

फिक्की का हमेशा से कहना है कि गूड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को जल्द से जल्द पेश किया जाना चाहिए। भारतीय उद्योग जगत के लिए यह एक गेमचेंजर कानून होगा और यह देश की कुल जीडीपी में करीब 2 फीसदी की वृद्धि ला सकता है। प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के समीक्षा की भी आवश्यकता है। सरकार को कर आधार बढ़ाने, कानून को आसान करने और कर छूट को तर्कसंगत बनाने से जुड़े मुद्दों को सुलझाना चाहिए। जीएएआर पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता है।


सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विनिवेश की एक व्यापक योजना के संकेत दिए जाने की जरूरत है। सरकार की आमदनी बढ़ाने में यह काफी कारगर है। जहां तक सरकार के खर्चों का सवाल है तो सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं की कवरेज और कार्यान्वयन प्रणाली पर दोबारा विचार करना जरूरी है। मनरेगा को नए सिरे से पेश करने की आवश्यकता है और इसे संपत्ति निर्माण और कौशल विकास से जोड़ा जाना चाहिए। इसके साथ ही सब्सिडी को बेहतर तरीके उपलब्ध कराने के लिए डायरेक्ट कैश ट्रांसफर मॉडल का विस्तार किया जाना चाहिए।

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