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मूंदरा प्लांट की क्षमता बढ़ाएगी टाटा पावर

Wed, 07 Jan 2015 11:30 AM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया Updated Wed, 07 Jan 2015 11:30 AM IST
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Tata Power to increase Mundera Plant capacity

बिजली बनाने वाली देश में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी टाटा पावर ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से गुजरात के मूंदरा स्थित अपने 4,000 मेगावाट क्षमता के अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (यूएमपीपी) के विस्तार की मंजूरी मांगी है। कंपनी ने मंत्रालय से इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने का आग्रह किया है।

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केंद्र सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों का बताना है कि टाटा पावर ने मूंदरा पावर प्लांट में आठ-आठ सौ मेगावाट के दो नए यूनिट लगाने के लिए गुजरात सरकार के साथ सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि गुजरात सरकार के साथ करार करने के मामले में कंपनी ने केंद्र सरकार को भरोसे में लिया था या नहीं, क्योंकि उसके 4,000 मेगावाट के यूएमपीपी के निविदा दस्तावेज में प्लांट के विस्तार को लेकर कोई जिक्र नहीं था।
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टाटा पावर केंद्र की पूर्ववर्ती यूपीए-2 सरकार के समय रिलायंस पावर को उसके अतिरिक्त (सरप्लस) कोयले का इस्तेमाल करने की अनुमति दिए जाने के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर करने वाली कंपनियों में शामिल थी। सुप्रीम कोर्ट ने कोल ब्लॉकों को निरस्त करते वक्त अपने फैसले में कहा था कि यूएमपीपी द्वारा अपने सरप्लस कोयले का इस्तेमाल अन्यत्र नहीं किया जा सकता है, न ही इसे बाजार में बेचा जा सकता है।
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सूत्रों के मुताबिक टाटा पावर ने प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरणीय मंजूरी हासिल करने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी संपर्क किया था। पर्यावरण मंत्रालय ने उससे यह कहते हुए अपनी अर्जी ऊर्जा मंत्रालय को भेजने को कहा था कि उसका यह प्लांट एक यूएमपीपी है। माना जा रहा है कि इसके बाद टाटा पावर ने अब ऊर्जा मंत्रालय से प्लांट के विस्तार की मंजूरी मांगी है।

इसके अलावा टाटा पावर ने ऊर्जा मंत्रालय से प्लांट से बिजली की खरीद के करार (पीपीए) के लिए एक सुरक्षित भुगतान प्रणाली (पीएसएम) तैयार किए जाने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का भी आग्रह किया है। करार के मुताबिक तयशुदा भुगतान प्रणाली के तहत बिजली की खरीद के लिए भुगतान में गड़बड़ी होने पर करार रद्द किए जाने की बात का जिक्र होता है।


टाटा पावर ने अपनी अर्जी में बताया है कि आरएलडीसी और पोसोको करार रद्द करने के उसके नोटिस पर कार्यवाही करने से इंकार कर चुकी हैं। इसके चलते भुगतान प्रणाली अप्रभावी हो गई है। टाटा पावर ने ऊर्जा मंत्रालय से कहा है कि प्लांट से खरीदी गई बिजली के लिए सही समय पर भुगतान किया जाना बिजली कंपनी के लिए बहुत जरूरी होता है। इससे भी ज्यादा यह कर्जदाताओं के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि प्लांट में करीब 70 फीसदी पूंजी उनकी ही लगी होती है।

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