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टाटा-अंबानी देंगे राजनीतिक पार्टियों को रुपए!

Thu, 13 Feb 2014 02:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 13 Feb 2014 02:07 PM IST
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tata-ambani will give politcal funding through trust

आम चुनावों के नजदीक आते ही देश की प्रमुख कंपनियों ने तेजी से अपने इलेक्टोरल ट्रस्ट बनाने शुरू कर दिए हैं।

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पिछले तीन महीनों में रिलायंस, टाटा, बिड़ला और महिंद्रा जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने ट्रस्ट का पंजीकरण कराया है।

नए कंपनी कानून के तहत राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए कंपनियों को इलेक्टोरल ट्रस्ट बनाना अनिवार्य है। कंपनियां इसी के जरिए राजनीतिक चंदा दे सकेंगी।

पैसों की फंडिंग के लिए बनाया ट्रस्ट

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कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय से मिले आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2013 से लेकर जनवरी 2014 के बीच में कई प्रमुख कॉरपोरेट ने अपने इलेक्टोरल ट्रस्ट का पंजीकरण कराया है।

इसके तहत टाटा ग्रुप ने जनवरी 2014 में ‘प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के नाम से पंजीकरण कराया है। वहीं कोलकाता स्थित बिड़ला ग्रुप ने ‘परिबर्तन इलेक्टोरल ट्रस्ट’ जनवरी में पंजीकृत कराया है। जनवरी में ही एक और कंपनी ने ‘रिफार्मेटिव इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के नाम से पंजीकरण किया है।

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दूसरे देशों से नहीं ले सकते हैं फंड

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दिसंबर 2013 में ‘महिंद्रा इलेक्टोरल ट्रस्ट’ का भी पंजीकरण कराया गया है। नवंबर में रिलायंस एडीए समूह ‘पीपुल्स इलेक्टोरल ट्रस्ट’ नाम से पंजीकरण करा चुका है।

एक और कंपनी ने प्रतिनिधि इलेक्टोरल ट्रस्ट के नाम से पंजीकरण कराया है। इन कंपनियों के अलावा पिछले तीन महीने में एक और ट्रस्ट गौरी वेलफेयर एसोसिएशन का भी पंजीकरण कराया गया है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कंपनियों को जो भी फंडिंग करनी है, वह इलेक्शन ट्रस्ट के जरिए कर सकती हैं। इसके लिए कंपनी कानून में प्रावधान किया है। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक होगा। इसमें कंपनी को केवल यह बताना होगा कि उसने ट्रस्ट को कितनी राशि दी है। ट्रस्ट किसी राजनीतिक दलों को कितनी राशि देता है, उसे डिसक्लोज करने की जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट पर होगी। कुल मिलाकर इसके जरिए पारदर्शिता बढ़ेगी।

नए नियमों के तहत ट्रस्ट के जरिए चंदा नकद में नहीं दिया जा सकेगा। साथ ही ट्रस्ट के लिए यह भी जरूरी होगा कि वह जिन व्यक्तियों से पूंजी जुटा रहे हैं, उनके पैन नंबर का विवरण जरूर लें। ट्रस्ट किसी विदेशी कंपनी या नागरिक से पूंजी नहीं जुटा सकेगा।

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