नई टैरिफ नीति बढ़ाएगी बिजली का बिल
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बिजली की प्रस्तावित नई टैरिफ नीति के लागू होने पर बिजली की दरों में बढ़ोतरी तय है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बिजली की अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। सरकार आगामी 21 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में बिजली के नए प्रस्तावित विधेयक को संसद में पेश करने जा रही है।
इस बिल पर स्थायी समिति की राय ली जा चुकी है। नई नीति के प्रस्ताव में यह प्रावधान किया गया है कि किसी भी कीमत पर बिजली वितरण करने वाली कंपनियों (डिस्कॉम) या लाइसेंसधारकों को किसी प्रकार का घाटा नहीं हो।
इस नीति के लागू होने पर बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) उस इलाके में बिजली वितरण के लिए लाइसेंस जारी कर सकती हैं। बिजली के वर्तमान कानून की 03 की धारा 61 (डी) में लिखा है कि उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए बिजली की लागत की वसूली तर्कसंगत तरीके से की जायेगी।
जनता पर बढ़ेगा बोझ
लेकिन नई नीति के तहत 61 (डी) के संशोधन प्रस्ताव में लिखा गया है कि बिजली
आपूर्ति करने वाली लाइसेंसी द्वारा बिजली लागत की पूरी वसूली की जाएगी
जिससे लाइसेंसी को कोई घाटा न हो और तदनुरूप धारा 62 के अनुसार टैरिफ तय
किया जाएगा। बिजली विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रकार के प्रस्ताव को मंजूरी
मिलने के बाद जनता को बढ़े टैरिफ का बोझ उठाना होगा।
क्योंकि बिजली वितरण
करने वाली लाइसेंसी कंपनी को सरकार की तरफ से ही यह अधिकार मिल जाएगा कि वह
अपनी लागत को बढ़ा कर दिखा सकेंगी। नियामक आयोग बिजली की लागत के आधार पर
ही बिजली की कीमत तय करता है।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने तो
प्रस्तावित नीति के खिलाफ मॉनसून सत्र के दौरान एक दिन की राष्ट्रव्यापी
हड़ताल की चेतावनी दी है। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि
फेडरेशन ने लोक सभा की बिजली मामलों की स्टैंडिंग कमेटी को जनवरी में
विस्तृत ज्ञापन भेज कर प्रस्तावित संशोधन बिल को वापस लेने की मांग की थी,
लेकिन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया।