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चीन से व्यापार 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य

Mon, 20 May 2013 10:45 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 20 May 2013 10:45 PM IST
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target to increase business with china at 100 billion dollar

भारत और चीन ने व्यापार के जरिए रिश्ते सुधारने के संकेत दिए हैं। चीन के प्रधानमंत्री ली कुचियांग की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए तीन अहम समझौते हुए हैं, जिनसे भारतीय कृषि उत्पाद, मीट-मछली और दवाइयों के लिए चीन का रास्ता खुल जाएगा।

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भारत और चीन की ओर से जारी साझा बयान में भी आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर काफी जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन की कंपनियों को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का न्योता देते हुए चीन से भारतीय उत्पादों को ज्यादा बाजार मुहैया कराने की मांग की है।
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चीन ने भी भारत के साथ बढ़ते व्यापार असंतुलन को कम करने पर तैयार हो गया है। भारत और चीन ने वर्ष 2015 तक विदेश व्यापार 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।
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भारत और चीन के बीच व्यापार से जुड़े दो अहम मुद्दों पर समझौते हुए हैं। इसमें खाद्य प्रसंस्करण, मीट, मछली और कृषि उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सहमति बनी है। उल्लेखनीय है कि चीन ने पपीता, अनानास जैसे भारत के 14 फल एवं सब्जियों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

इस समझौते के तहत दोनों देश निर्यात निरीक्षण परिषद का गठन करेंगे, जो खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी। दोनों देश ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए संयुक्त आर्थिक समूह के तहत तीन कार्यदल बनाने के लिए भी समझौते किया है।

चीन के साथ हुए व्यापारिक समझौते के बारे में वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि भारत चीन के सामने जिन मुद्दों को उठाता रहा है, उन पर समझौता होना एक अच्छी शुरुआत है। गुणवत्ता और दाम के लिहाज से भारतीय उत्पाद विश्व बाजार की प्रतिस्पर्धा का सामना करने में सक्षम हैं।

कम किया जाएगा व्यापार असंतुलन
भारत और चीन ने वर्ष 2015 तक विदेश व्यापार 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। चीन भारत के साथ बढ़ते व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए कदम उठाने पर राजी हो गया है।

चीन से भारत को होने वाला निर्यात, भारत से चीन को होने वाले निर्यात से कहीं ज्यादा है। वर्ष 2001-02 में यह व्यापार असंतुलन करीब 1 अरब डॉलर था, जो वर्ष 2012-13 में बढ़कर 41 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। गत वर्ष आर्थिक सुस्ती के चलते दोनों देशों के व्यापार में करीब 10 फीसदी की गिरावट आई है।

चीन जाएगा भारत का मीट
आखिरकार भारत के मीट उत्पादों पर चीन को भरोसा हो गया है। चीन के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा दौरान मीट और मछली के निर्यात को लेकर दोनों देशों के संबंधित विभागों के बीच समझौता हुआ है। चीन अपने यहां खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मीट के आयात का बढ़ावा दे रहा है। इससे भारत के मीट उद्योग को एक बड़ा बाजार मिलने जा रहा है।

दवाओं के लिए भी खुलेंगे चीन के रास्ते
चीन को दवाओं का निर्यात करने में मुश्किलों का सामना कर रहे भारतीय फार्मा उद्योग के लिए भी अच्छी खबर है। भारत और चीन के बीच दवा व हेल्थ उत्पादों के व्यापार बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इससे घरेलू दवा उद्योग के लिए चीन के रास्ते खुल सकते हैं। पिछले पांच वर्षों से चीन भारत को करीब 433 करोड़ डॉलर के फार्मा उत्पाद भेजता है, जबकि भारत से सिर्फ 70 करोड़ डॉलर की दवाएं चीन को जाती हैं।


विशेषज्ञ टिप्पणी
भारत और चीन के बीच जिन क्षेत्रों में समझौते हुए हैं, उस भागीदारी के नए रास्ते खुल सकते हैं। लेकिन अभी दोनों देशों को व्यापार असंतुलन कम करने की दिशा में बड़ा फासला तय करना है।
- अलका आचार्य, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज

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