फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   take seven step for net banking

7 बातें जो आपके डेबिट-क्रेडिट कार्ड को बचाएंगी खतरे से

Mon, 21 Apr 2014 12:28 PM IST
Updated Mon, 21 Apr 2014 12:28 PM IST
विज्ञापन
take seven step for net banking

देश में तेजी से हो रहे इंटरनेट के विस्तार से संचार एवं सूचनाओं तक पहुंच काफी आसान हो गई। मोबाइल के जरिए इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल से इसका दायरा और तेजी से बढ़ रहा है।

विज्ञापन


बैंकिंग के क्षेत्र में भी इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल का काफी व्यापक असर हुआ है। आज देश में ऑनलाइन बैंकिंग ग्राहकों के बीच उपयोग के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है।
विज्ञापन


लेकिन, इंटरनेट के बढ़ते दायरे के साथ-साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि, इस धोखाधड़ी के मामले पूरे ऑनलाइन लेनदेन की तुलना में काफी कम हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


फिर भी बैंक अपने ग्राहकों को धोखाधड़ी से पूरी तरह से सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। ग्राहकों को भी इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि वह ऑनलाइन धोखाधड़ी से अपने लेनदेन को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

लेनदेन में बरतें पूरी सावधानी

take seven step for net banking

ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों से निपटना और लेनदेन को सुरक्षित बनाना बैंकों और ग्राहकों के लिए एक चुनौती है। बैंकों के साथ-साथ ग्राहक भी छोटी-मोटी सावधानियां बरतें, तो ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने में काफी मदद मिलेगी।

ग्राहकों के लिए सुरक्षा का पहला कदम है सतर्क रहना। ऑनलाइन लेनदेन में ग्राहकों को हमेशा सतर्कता रखनी चाहिए और बैंकों द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।

बैंक ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए अपने स्तर पर लेनदेन सुरक्षित सर्वर पर सुनिश्चित कराने, बहुस्तरीय प्रमाणीकरण व्यवस्था जैसे कई तरह के सुरक्षा उपाय अपना रहे हैं।

एंटी वायरस सॉफ्टवेयर का करें प्रयोग

take seven step for net banking

उपभोक्ता के लिए यह अत्यंत जरूरी है कि वह किसी प्रतिष्ठित कंपनी से ही एंटी वायरस खरीदें और इसे अपने सभी उपकरणों जैसे- लैपटॉप, स्मार्टफोन और टैबलेट पर इंस्टॉल कर लें। इससे भी महत्वपूर्ण बात है कि एंटी वायरस सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी द्वारा भेजे जाने वाले अपडेट्स को डाउनलोड कर नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहें।

अपने ऑपरेटिंग सिस्टम की वेबसाइट पर भी अपडेट्स और सुरक्षा पैकेज देखते रहें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि आपके उपकरण पर कोई भी माल वेयर या स्पाई वेयर इंस्टाल न हो पाए। आपके इंटरनेट या मोबाइल बैंकिंग के प्वाइंट ऑफ  एक्सेस जैसे वाई-फाई व ब्लूटूथ भी मजबूत पासवर्ड से सुरक्षित होने चाहिए।

फिशिंग और विशिंग से रहें सचेत

take seven step for net banking

अधिकांश वित्तीय (बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड ) धोखाधड़ी फिशिंग से शुरू होती है। इसमें जानी पहचानी संस्थाओं जैसे बैंक, लोकप्रिय शॉपिंग वेबसाइट आदि के नाम से ईमेल भेजे जाते हैं और ग्राहकों से निजी जानकारी मांगी जाती है।

फिशिंग ई मेल में आमतौर पर ई मेल पर ही या तो गोपनीय विवरण दर्ज कराते हैं या आपसे दिए गए लिंक पर क्लिक करने के लिए कहते हैं, जो आपको वास्तविक बैंक की तरह एक दूसरी वेबसाइट पर ले जाता है। जिस पर आपसे यूजर आईडी और पासवर्ड दर्ज करने के लिए कहा जाता है।

अर्थात, इंटरनेट बैंकिंग खातों तक पहुंच पाने के लिए धोखेबाज ई मेल फिशिंग, विशिंग (आवाज द्वारा फोन पर फिशिंग) और एसएमएस का उपयोग कर सकते हैं। इसमें आम तौर पर मोबाइल नंबर, लॉग-इन आईडी, पासवर्ड, डेबिट कार्ड के विवरण, सीवीवी, जन्म तिथि, मां का प्रथम नाम आदि शामिल होते हैं।

यह ध्यान रहे कि बैंक शायद ही कभी ऐसी जानकारी फोन पर मांगते हों इसलिए अज्ञात स्रोतों से आए ई मेल, फोन और एसएमएस के बारे में सतर्क रहना चाहिए।

पासवर्ड मजबूत बनाएं व बदलते रहें

take seven step for net banking

ऑनलाइन बैंकिंग ग्राहक को मजबूत पासवर्ड बनाना चाहिए। यह धोखाधड़ी से बचने का सरल और सबसे प्रभावी कदम है। उपभोक्ता को कम से कम आठ डिजिट का पासवर्ड रखना चाहिए, जिसमें अल्फा-न्यूमेरिक और विशेष कैरेक्टर भी शामिल हों।

अपने पासवर्ड में जन्म की तारीख जैसी सामान्य जानकारी का उपयोग करने से बचें। 60 दिनों में अपने पासवर्ड को बदलते रहें। इसके अलावा अपना लॉग-इन आईडी और पासवर्ड कहीं भी न लिखें।

वायरलेस नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन बैंकिंग में रखें सावधानी

take seven step for net banking

यदि आपके घर पर वायरलेस राउटर है, तो सुनिश्चित कर लें कि यह लॉक्ड है। आपको साइबर कैफे या किसी साझे कंप्यूटर से अपने इंटरनेट बैंकिंग खाते को एक्सेस करने से बचना चाहिए।

यदि आपको किन्हीं अपरिहार्य कारणों से ऐसा करना पड़ता है, तो भविष्य में उपयोग के उद्देश्य से उपयोगकर्ता नाम या पासवर्ड कभी भी इसमें स्टोर न करें। काम हो जाने के बाद लॉग ऑफ  करें और कंप्यूटर की कैश मेमोरी जरूर खाली कर दें।

हमेशा यह ध्यान रखें कि आपका बैंक या कोई भी प्रतिष्ठित बिजनेस आपको कभी भी ई मेल भेज कर, कॉल कर या एसएमएस से आपको अपना खाता संख्या, पासवर्ड, यूजर नाम और अन्य व्यक्तिगत जानकारी अपडेट करने के लिए नहीं कहेगा। भले ही इसका विलय हो गया हो या इसका अधिग्रहण कर लिया गया हो।

कुछ अन्य अहम उपाय स्पैम मेल न खोलें

take seven step for net banking

अपरिचित प्रेषकों से आने वाले मेल एसएमएस और फोनकॉल से सावधान रहें जो आपसे गोपनीय जानकारी मांगता हो।
ऑनलाइन लेनदेन में ब्राउजर में सुरक्षित आइकॉन देखें, जैसे ''https:'', यहां एस का अर्थ सेफ है।
नियमित रूप से अपने खाते के स्टेटमेंट की जांच करें।
यदि साइबर कैफे या साझा कंप्यूटर का प्रयोग किया है, तो अपने कंप्यूटर से पासवर्ड बदल दें।
यदि अपने खाते में कोई भी संदिग्ध लेनदेन दिखे तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed