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कर्नाटक में खनन करने वाले 49 पट्टे रद्द

Fri, 19 Apr 2013 08:44 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Fri, 19 Apr 2013 08:44 AM IST
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supreme court orders closure of mines with max illegality in karnataka

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की सिफारिशों पर बृहस्पतिवार को कर्नाटक में बेल्लारी, तुंकुर और चित्रांगदा जिलों में सबसे अधिक अनियमितता बरतने वाले 49 खनन पट्टे रद्द कर दिए।

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लेकिन कम वैधता वाली खदानों में खनन गतिविधियां शुरू करने की अनुमति प्रदान कर दी। समिति ने इस इलाके में खदानों की ए, बी और सी श्रेणियां बनाई थीं। सबसे कम या नगण्य अनियमितताओं वाली खदानों को ए श्रेणी में रखा गया, जबकि सबसे अधिक अनियमितता वाली खदानों को सी श्रेणी में रखा गया था।
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जस्टिस आफताब आलम की अध्यक्षता वाली पीठ ने कर्नाटक में खनन के मसले पर समिति की ज्यादातर सिफारिशें स्वीकार करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश-कर्नाटक सीमा पर लौह अयस्क के गैरकानूनी खनन दोनों राज्यों के बीच सीमा का निर्धारण पूरा होने तक निलंबित रहेगा।
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अदालत ने गैर सरकारी संगठन समाज परिवर्तन समुदाय की याचिका पर यह आदेश जारी किया। इस संगठन का आरोप था कि बेल्लारी, तुंकुर और चित्रांगदा जिलों में खनन के लाइसेंस धारक निजी कंपनियों के साथ ही सरकारी स्वामित्व वाली मैसूर माइनिंग लिमिटेड में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरतने के साथ अवैध काम कर रही हैं।


सर्वोच्च अदालत ने पिछले साल 3 सितंबर को कर्नाटक में खनन कार्य पर लगी रोक आंशिक रूप में हटाते हुए श्रेणी के 18 पट्टा धारकों को कुछ शर्तो के साथ लौह अयस्क के खनन के लिए हरी झंडी दे दी थी।

अदालत ने इस संबंध में समिति की सिफारिशें स्वीकार कर ली थीं। समिति ने इन तीन जिलों में 18 कंपनियों को कारोबार करने की अनुमति देने की सिफारिश भी की थी।

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