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सुब्रत राय को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

Tue, 10 Dec 2013 11:10 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 10 Dec 2013 11:10 AM IST
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supreme court notice to subrata roy

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2जी स्पेक्ट्रम जांच में कथित रूप से हस्तक्षेप करने के आरोप में सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय के खिलाफ अवमानना कार्यवाही के लिए नोटिस जारी किया।

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निवेशकों को धन लौटाने के मामले में अदालत की नाराजगी झेल रहे सुब्रत राय के लिये यह नई परेशानी है। करोडऱूपए के 2जी मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय के जांच अधिकारी राजेश्वर सिंह की अवमानना याचिका पर अदालत ने राय को नोटिस जारी करते हुये कहा कि यह याचिका विचार योग्य है।
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सर्वोच्च अदालत निवेशकों का धन लौटाने के शीर्ष अदालत के न्यायिक आदेशों पर अमल नहीं करने के कारण पहले ही सुब्रत राय के विदेश जाने पर रोक लगा चुका है।

जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस केएस राधाकृष्णन की पीठ ने जांच अधिकारी को कथित रूप से धमकी देने और ब्लैकमेल करने वाले सहारा समूह के दो पत्रकारों उपेन्द्र राय और सुबोध जैन को भी नोटिस जारी किए हैं।
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पीठ ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राजेश्वर सिंह के आरोप बहुत ही गंभीर हैं। साथ ही अदालत ने राय और उनके कर्मचारियों की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि अवमानना याचिका विचार योग्य नहीं है। क्योंकि यह अटार्नी जनरल की मंजूरी के बगैर दाखिल की गयी है।

पीठ ने कहा कि संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्र है और अदालत की अवमानना कानून के तहत सर्वोच्च अदालत के अधिकार-क्षेत्र और अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता है।

पीठ ने अवमानना याचिका की विचार योग्यता पर अपने फैसले में कहा कि प्रतिवादियों को कारण बताओ नोटिस जारी की जाती है कि न्यायालय की निगरानी वाली आपराधिक जांच में हस्तक्षेप के लिये उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाये।

पीठ ने कहा कि अदालत की निगरानी वाली जांच को प्रभावित करने के किसी भी व्यक्ति का हस्तक्षेप न्यायिक प्रशासन में हस्तक्षेप है। शीर्षस्थ अदालत की प्रतिष्ठा और उसके अधिकार की हर कीमत पर रक्षा करना न्यायालय का कर्तव्य है ऐसा नहीं होने पर समूची न्याय व्यवस्था चरमरा जाएगी।

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि उसकी निगरानी वाले किसी मामले की जांच को प्रभावित किया जाता है या जांच अधिकारी पर दबाव डाला जाता है तो ऐसे अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह इसकी जानकारी न्यायालय को दे।

पीठ ने कहा कि जब किसी आपराधिक मामले की अदालत निगरानी करता है तो इसमें जनता का भरोसा होता है और अदालत को इस भरोसे तथा विश्वास को बनाये रखना है और जांच में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से सख्ती से निपटना होगा।

गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने गतवर्ष 6 मई को कहा था कि पहली नजर में उसका मानना है कि सिंह की ओर से की जा रही जांच में हस्तक्षेप का प्रयास किया गया है।


अदालत ने सहारा इंडिया न्यूज नेटवर्क और उसकी सहयोगी कपंनियों को सिंह को सुबोध जैन की ओर से भेजे गये 25 सवालों से संबंधित कोई भी कार्यक्रम प्रकाशित या प्रसारित करने पर रोक लगा दी थी। सुबोध जैन ने सिंह को 25 सवाल भेजकर उनसे जवाब मांगा था जो निहायत ही निजी प्रकृति के थे।

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