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सुप्रीम कोर्ट का फैसला बनेगा मोदी सरकार के लिए आफत?

Thu, 25 Sep 2014 12:38 PM IST
Updated Thu, 25 Sep 2014 12:38 PM IST
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Supreme Court Verdict on Coal Blocks Allocation - Trouble for BJP Government

सुप्रीम कोर्ट की ओर से 214 कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द किया जाना मोदी सरकार लिए आफत साबित हो सकता है। जब देश की अर्थव्यवस्था में थोड़े सुधार के लक्षण दिख रहे हों तब इस तरह की चोट बड़ा नुकसान कर सकती है।

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कोल ब्लॉक आवंटन रद्द होने का असर चौतरफा होगा। बैंकों, स्टील, सीमेंट और बिजली समेत कई निजी और सार्वजनिक कंपनियों पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर पड़ेगा।
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क्योंकि कोयला सेक्टर पर इनके 7.65 लाख करोड़ रुपये दांव पर लगे हैं। सबसे ज्यादा असर बैंकों पर पड़ेगा। दरअसल बैंकों ने बिजली पैदा करने वाली कंपनियों को कर्ज और निवेश के तौर पर पांच लाख करोड़ रुपये दिए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने लगाया जुर्माना

Supreme Court Verdict on Coal Blocks Allocation - Trouble for BJP Government

सुप्रीम कोर्ट ने 42 कोल ब्लॉक से निकाले जाने वाले हरेक टन कोयले पर 295 रुपए का जुर्माना लगाया है। इस हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा घाटा जिंदल पावर एंड स्टील, हिंडाल्को, रिलायंस पावर, एस्सार और भूषण स्टील जैसी कंपनियों को होगा।

उन्हें छह महीने के अंदर हर्जाने के तौर पर बड़ी रकम अदा करनी होगी। बैंकों ने स्टील और सीमेंट कंपनियों को 2.65 लाख करोड़ रुपये दिए हैं। अब एक बार फिर कॉरपोरेट डेट री-स्ट्रक्चरिंग यानी कर्ज की शर्तें नए सिरे तय करने की मांग होगी।

बैंक, पहले ही कॉरपोरेट डेट री-स्ट्रक्चरिंग के तहत कंपनियों के 80000 करोड़ रुपये के कर्ज के लिए नई शर्तें तय कर चुके हैं। बैंकों पर कॉरपोरेट कंपनियों की ओर से कर्ज न चुकाने का बोझ बढ़ता ही जा रहा है।

बैंकों का डूब सकता है कर्ज

Supreme Court Verdict on Coal Blocks Allocation - Trouble for BJP Government

क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कोयला, बिजली और स्टील सेक्टर की कंपनियों को 600 से 720 अरब रुपये का कर्ज दिया है।

दूसरी ओर कंपनियों ने चालू कोल ब्लॉकों में लगभग तीन लाख करोड़ का निवेश किया है। यह पैसा इन खदानों को विकसित करने में लगाया गया है।

चूंकि रद्द होने वाले कोल ब्लॉकों की तादाद 200 से भी ज्यादा है इसलिए यह आंकड़ा तीन लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। मैक्वर रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्लॉकों का आवंटन रद्द होने से कोयले का आयात बिल बढ़ कर 18000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। सबसे ज्यादा असर जिंदल स्टील और हिंडाल्को पर पड़ेगा।

शेयर बाजार में हुआ कंपनियों को 52,000 करोड़ का घाटा

Supreme Court Verdict on Coal Blocks Allocation - Trouble for BJP Government

खदानों का आवंटन रद्द होने का असर शेयर बाजार पर भरपूर रहा। कोयला, स्टील, बिजली और मेटल कंपनियों के शेयरों को भारी नुकसान हुआ।

25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोल ब्लॉकों के आवंटन को गैरकानूनी करार देने के बाद 23 बड़ी इस्पात और बिजली कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाने वाले निवेशक लगभग 52,000 करोड़ रुपये कोर्ट का फैसला आते ही निवेशकों ने बाजार में 52,000 करोड़ रुपये गंवा दिए।

कंपनियों को तीन लाख करोड़ की चपत
कोल ब्लॉक विकसित करने वाली कंपनियों ने लगभग तीन लाख करोड़ का निवेश किया है। चूंकि रद्द होने वाले कोल ब्लॉकों की तादाद 200 से भी ज्यादा है इसलिए यह आंकड़ा तीन लाख करोड़ रुपये का हो सकता है।

निवेशकों को भारी घाटा
कोयला, स्टील, बिजली और मेटल कंपनियों के शेयरों को भारी नुकसान हुआ। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोल ब्लॉकों के आवंटन को गैरकानूनी करार देने के बाद 23 बड़ी इस्पात और बिजली कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लगभग 52,000 करोड़ रुपये डूब गए।

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