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टूजी मामले में सुनील मित्तल सहित चार को समन

Wed, 20 Mar 2013 12:11 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी
नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी Updated Wed, 20 Mar 2013 12:11 AM IST
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sunil mittal and ravi ruia summoned in 2g case

अदालत ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के कार्यकाल में हुए अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में भारती सेल्युलर के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सुनील मित्तल, एस्सार समूह के प्रमोटर रवि रुईया व हचिसन मैक्स टेलीकॉम प्राइवेट के तत्कालीन प्रबंध निदेशक असीम घोष को भी अभियुक्त बनाया गया है।

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अदालत ने कहा कि इनके खिलाफ भी अन्य अभियुक्तों की तरह मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। इन तीनों को सीबीआई ने आरोपपत्र में अभियुक्त नहीं बनाया था। दूसरी ओर, एजेंसी के मुताबिक भारती सेल्युलर और एस्सार ने कोर्ट को इस आदेश को चुनौती देने की बात कही है।
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पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए सीबीआई के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उक्त तीनों कंपनियों के किसी भी प्रतिनिधि के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए साक्ष्य नहीं हैं।
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अदालत ने कहा कि मात्र सरकारी अधिकारियों व कंपनियों को दोषी बनाने से षड़यंत्र का मामला नहीं बनता। कंपनियों के मालिकों ने ही सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटित करवाया। स्पष्ट है कि इनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है।

अदालत ने इनके अलावा पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष, तीन दूरसंचार कंपनियों भारती सेल्युलर, हचिसन मैक्स टेलीकॉम प्राइवेट (अब वोडाफोन इंडिया) व स्टर्लिंग सेल्युलर (अब वोडाफोन मोबाइल सर्विस) के खिलाफ समन जारी कर सभी को बतौर अभियुक्त 11 अप्रैल को पेश होने का निर्देश दिया है।

अदालत ने अपने दो पृष्ठ के आदेश में कहा कि श्यामल घोष तथा तीन दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ  मुकदमा चलाने के लिए दस्तावेज व साक्ष्य मौजूद हैं। सीबीआई ने इस मामले में 21 दिसंबर, 2012 को आरोपपत्र दायर किया था। तभी से आरोपपत्र पर संज्ञान लेने की सुनवाई विचाराधीन थी, लेकिन सीबीआई अदालत को संतुष्ट नहीं कर पाई कि आखिर बिना कंपनियों के अधिकारियों की मिलीभगत घोटाला कैसे हो गया।


इतना ही नहीं सीबीआई अतिरिक्त स्पेक्ट्रम हासिल करने के लिए इन कंपनियों के निदेशक मंडलों में पारित प्रस्तावों से संबंधित दस्तावेज भी पेश नहीं कर पाई थी। सीबीआई का आरोप है कि अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के आवंटन से सरकारी खजाने को 846 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। यह घोटाला राजग के तत्कालीन संचार मंत्री प्रमोद महाजन के कार्यकाल में हुआ था।

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