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चीनी मिलों को मिलेगा राहत पैकेज?
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 26 Nov 2013 12:33 PM IST
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चीनी मिलों को संकट से उबारने के लिए राहत पैकेज को लेकर सरकार के भीतर विचार-विमर्श शुरू हो चुका है।
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पिछले सप्ताह इस मुद्दे पर कृषि मंत्री शरद पवार के साथ वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की मुलाकात के बाद खाद्य और वाणिज्य मंत्रालय राहत पैकेज की संभावनाएं तलाशने में जुट गए हैं।
इस बीच, मंगलवार को गन्ने के दाम और चीनी मिलों की स्थिति को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर सकते हैं। यूपी के अलावा महाराष्ट्र में भी गन्ने के भाव को लेकर किसान आंदोलन कर सकते हैं।
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कृषि मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि खाद्य और उद्योग मंत्रालय को चीनी उद्योग को दी जाने वाली संभावित रियायतों की संभावना तलाशने को कहा गया है।
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खाद्य मंत्रालय शुगर डेवलपमेंट फंड (एसडीएफ) के जरिए दिए जाने वाले ब्याज मुक्त कर्ज और एथेनॉल की बिक्री से जुड़े पहलुओं पर विचार कर रहा है जबकि वाणिज्य मंत्रालय चीनी के निर्यात को बढ़ावा देने, ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें बढ़ाने और रॉ शुगर के आयात की शर्तों में छूट की गुंजाइश तलाश रहा है।
पैकेज के प्रस्ताव से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि खाद्य और वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर मंत्रियों का अनौपचारिक समूह रियायतों पर विचार कर सकता है। इसके बाद प्रस्ताव कैबिनेट का भेजा जाएगा।
केंद्र सरकार यूपी में चीनी मिलों के न चलने और गन्ने का भाव नहीं बढ़ने का मुद्दा सपा की राज्य सरकार के पाले में डाल रही हैं, लेकिन महाराष्ट्र में जहां कांग्रेस और एनसीपी की सरकार है, वहां भी वह किसानों के आंदोलन से जूझ रही है। महाराष्ट्र के सीएम पृथ्वीराज चव्हाण ने मंगलवार को प्रधानमंत्री से मिलने का समय लिया है। सहकारी चीनी मिलों के संगठन एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष कल्लप्पा बी. अवाडे और एमडी एमजी जोशी भी मौजूद रहेंगे।
चीनी मिलों के दबाव और चुनावी साल में केंद्र सरकार के रुख को देखते हुए लग रहा है कि चीनी मिलों को दो साल के उत्पाद शुल्क के बराबर ब्याज मुक्त कर्ज व निर्यात से जुड़ी कुछ रियायतें मिल सकती हैं।