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अब चीनी की बारी, जल्द बढ़ सकते हैं दाम
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 21 Nov 2013 12:03 PM IST
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जल्द ही चीनी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। मेहनतकश किसानों के घाटे को पूरा करने के लिए सरकार जल्द ही किसानों की इन महत्वपूर्ण मांगों को पूरा कर सकती है।
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अगर केंद्र सरकार किसानों की मांग का पूरा कर देती है। मेहनतकश किसानों को तो खुशियां मिलेगी पर गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ने से चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों के लिए चीनी महंगी हो जाएगी।
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उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गन्ना मूल्य को लेकर चल रहे किसान आंदोलनों की आंच केंद्र सरकार महसूस करने लगी है।
यही वजह है कि चीनी उद्योग को पैकेज देने को लेकर कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए बुधवार को कृषि मंत्री शरद पवार, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा और नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने इस मुद्दे पर बैठक की।
बैठक में नहीं शामिल हुए खाद्य मंत्री
चौंकाने वाली बात यह रही कि इस बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) केवी थॉमस शामिल नहीं हुए, जबकि चीनी विभाग थॉमस के मंत्रालय का हिस्सा है। पैकेज के लिए प्रस्ताव भी उनके मंत्रालय द्वारा ही तैयार किया जाएगा।
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बैठक के बाद पवार ने संवाददाताओं को बताया कि चीनी उद्योग को पैकेज को लेकर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है। इस बारे में सप्ताह भर में फिर बैठक होगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अभी केंद्र किसी तरह की वित्तीय मदद करने की स्थिति में नहीं है।
शुगर डेवलपमेंट फंड
गन्ना मूल्य पर उत्तर प्रदेश सरकार से हम कोई बात नहीं करेंगे। चिदंबरम ने कहा कि इस संबंध में कोई भी फैसला सप्ताह भर में संभव है। अजित सिंह ने कहा कि सरकार उद्योग को ब्याज मुक्त कर्ज देने के लिए शुगर डेवलपमेंट फंड (एसडीएफ) से मदद पर विचार कर सकती है।
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साथ ही आयातित रॉ शुगर (गैर रिफाइंड चीनी) के निर्यात के लिए तय 18 माह की समय सीमा को कम किया जा सकता है, लेकिन कोई फैसला कैबिनेट ही लेगी। हालांकि इस बीच पवार ने अजित सिंह को इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।
सूत्रों का कहना है कि खाद्य मंत्रालय का चीनी विभाग अभी किसी भी पैकेज पर विचार नहीं कर रहा है। मंत्रालय का मानना है कि चीनी उद्योग को सरकार नियंत्रण मुक्त कर चुकी है और गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी को लेकर जो संकट है उसे राज्य सरकारें हल करें।
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चीनी उद्योग के संकट
थॉमस का इस बैठक में शामिल नहीं होना मंत्रालय के इस रुख को साफ करता है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से आपस में बातचीत कर इस मुद्दे के हल पर विचार करने के लिए कहा था। असल में गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के संकट के केंद्र उत्तर प्रदेश में निजी चीनी मिलों का कहना है कि गन्ने का मूल्य रंगराजन समिति द्वारा सुझाये गए फार्मूले के आधार पर तय हो, जिसमें चीनी की कीमत को गन्ना मूल्य से जोड़ा गया है।
इस मुद्दे का हल नहीं होने से मंगलवार को 68 चीनी मिलों ने पेराई शुरू नहीं कर पाने का पत्र राज्य सरकार को सौंप दिया है। इसके चलते वहां हालात काफी पेचीदा हो गए हैं। इसी तरह महाराष्ट्र के किसान संगठन भी 300 रुपये प्रति क्विंटल के दाम के लिए आंदोलन कर रहे हैं। मिलों का कहना है कि चीनी की कम कीमतों के चलते वह घाटे में मिलें चलाने के लिए तैयार नहीं हैं।
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इसके लिए चीनी उद्योग ने केंद्र से उत्पाद शुल्क के तीन साल के भुगतान के बराबर ब्याज मुक्त कर्ज की मांग की है। यह राशि करीब 6,000 करोड़ रुपये बैठती है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अबिनाश वर्मा का कहना है कि 2006-07 और 2007-08 के लिए केंद्र ने 3,800 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज उद्योग को उपलब्ध कराया था। यह कर्ज बैंकों ने चीनी मिलों को दिया था और ब्याज का भुगतान केंद्र सरकार ने किया था। मिलों ने यह पैसा चार साल में लौटाया था।
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पीएम को पैकेज के लिए चिट्ठी
गन्ना किसानों को उपज का बेहतर मूल्य और अन्य दूसरे पैकेज उपलब्ध कराने के लिए स्वाभिमानी शेतकारी संगठन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी है।
संगठन के प्रेसिडेंट और लोकसभा सांसद राजू शेट्टी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार किसानों को गन्ने की पहली किस्त के लिए 3,000 रुपये प्रति टन की दर से भुगतान सुनिश्चित कराए। इसके अलावा, गन्ना किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दे और विदेशों से रॉ शुगर (गैर रिफाइंड चीनी) के आयात पर 15 फीसदी शुल्क लगाए।
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इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि चीनी मिलों को चीनी निर्यात के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। यदि सरकार इन मुद्दों पर तत्काल विचार करती है, तो यह किसानों के हित में होगा।
•खाद्य मंत्रालय का रवैया उदासीन, खाद्य मंत्री थॉमस नहीं आए बैठक में
•केंद्र सरकार फिलहाल वित्तीय मदद करने की स्थिति में नहीं : पवार
•एसडीएफ की मदद से मिलों को दिलाया जा सकता है ब्याज मुक्त कर्ज
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•घट सकती है रॉ शुगर आयात की 18 माह की समय सीमा : अजित
•मिलें चाहती हैं रंगराजन फार्मूले पर तय किया जाए गन्ने का मूल्य