{"_id":"969f9fca-40a4-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"sugar-cane-prices-increased-40-per-quintal","type":"story","status":"publish","title_hn":"गन्ना मूल्य 40 रुपये प्रति कुंतल बढ़ा","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
गन्ना मूल्य 40 रुपये प्रति कुंतल बढ़ा
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Sat, 08 Dec 2012 01:00 AM IST
विज्ञापन
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को चालू पेराई सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) घोषित कर दिया। चालू पेराई सत्र में चीनी मिलें किसानों को अगैती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 290 रुपये प्रति कुंतल की दर से भुगतान करेंगी।
विज्ञापन
सामान्य प्रजाति की 280 और अनुपयुक्त प्रजाति की कीमत 275 रुपये प्रति कुंतल तय की गई है। सरकार ने नए पेराई सत्र में पिछले साल की तुलना में प्रति कुंतल 40 रुपये की बढ़ोतरी की है, लेकिन किसानों के हिस्से में यह बढ़ोतरी महज 37 रुपये आएगी क्योंकि परिवहन व्यय में तीन रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की गई है।
विज्ञापन
किसानों के साथ सरकार ने चीनी मिलों भी खुश रखने की कोशिश की है। चीनी मिलें अब किसानों के गन्ना मूल्य से प्रति कुंतल परिवहन व्यय के रूप में 5.75 रुपये की जगह 8.75 रुपये प्रति कुंतल की दर से कटौती करेंगी। सरकार का दावा है कि गन्ना मूल्य में वृद्धि से पेराई सत्र 2011-12 के मुकाबले 2012-13 में किसानों को 3300 करोड़ रुपये अधिक गन्ना मूल्य मिलेगा और चालू पेराई सत्र में किसानों को करीब 21,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।
विज्ञापन
किसानों की मांग थी 318-350 रुपये
योजना भवन में 31 अक्तूबर को मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में राज्य परामर्शी गन्ना मूल्य निर्धारण समिति की बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्पादन लागत में बढ़ोतरी को देखते हुए गन्ना मूल्य कम से कम 318-350 रुपये प्रति कुंतल घोषित किए जाने दलील पेश की थी।
किसान प्रतिनिधियों ने बैठक में कहा था कि समाजवादी पार्टी गन्ना मूल्य में 50 प्र्रतिशत बढ़ोतरी करने का ऐलान कर चुकी है। गन्ना शोध संस्थान व सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ के अध्ययन के मुताबिक, प्रति कुंतल गन्ना उत्पादन लागत क्रमश: 228 व 232 रुपये बैठ रही है।
मिलों को पहले से मिल रहा फायदा
किसानों का तर्क यह भी था कि पिछले सीजन से अब तक चीनी की कीमत में करीब 1000 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि हो चुकी है जिसका फायदा मिलों को मिल रहा है। गन्ना मिलों का फायदा बगास, इथेनाल, स्प्रिट और बिजली के उत्पादन से भी बढ़ा है।
इसके विपरीत किसानों को सूखा, रोग और परता गिरने की वजह से प्रदेश का औसत उत्पादन अधिकतम 575 कुंतल प्रति हेक्टेयर ही रह गया है। यही नहीं खाद, डीजल और कीटनाशक की कीमत में बेतहाशा बढ़ोतरी से किसानों को गन्ने का उत्पादन लागत प्रति कुंतल 352 रुपये बैठ रहा है।
ऐसे में सरकार अगैती प्रजाति के गन्ने की कीमत कम से कम 360 रुपये, सामान्य प्रजाति की कीमत 350 रुपये और अनुपयुक्त प्रजाति के गन्ने का मूल्य 340 रुपये प्रति कुंतल घोषित करे।
प्रतिक्रिया
किसानों को दोहरा झटका
सरकार ने पेराई सत्र शुरू होने के दो महीने बाद गन्ना मूल्य घोषित कर लाखों किसानों के करोड़ों रुपये का नुकसान करा दिया है। समय से एसएपी घोषित नहीं किए जाने की वजह से जरूरतमंद लाखों किसानों ने औने-पौने दामों में गन्ना कोल्हू व क्रशर मिलों में बेच दिया। इसकी भरपाई सरकार कैसे करेगी। मुख्यमंत्री ने किसानों को दोहरा झटका परिवहन खर्च में प्रति कुंतल 3 रुपये बढ़ोतरी करके दिया है।
-वी एम सिंह, अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन
उम्मीदों पर पानी फेर दिया
किसानों के लागत मूल्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को गन्ना मूल्य घोषित करना चाहिए था। डीजल और खाद की कीमत में बेतहाशा वृद्धि को देखते हुए कम से कम 300 रुपये प्रति कुंतल गन्ना मूल्य किसानों को मिलना ही चाहिए। इसी तरह परिवहन शुल्क में भारी बढ़ोतरी करके सरकार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया हैै।
-डॉ. सुधीर पंवार, किसान मंच
बारह साल में यूं बढ़ा प्रति कुंतल गन्ना मूल्य
साल अगेती सामान्य अनुपयुक्त
2001-02 100 95 92.50
2002-03 100 95 95.50
2003-04 100 95 95.50
2004-05 112 107 104.50
2005-06 120 115 112.50
2006-07 130 125 122.50
2007-08 130 125 122.50
2008-09 145 140 137.50
2009-10 170 165 162.50
2010-11 210 205 200
2011-12 250 240 235
2012-13 290 280 275