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सभी तरह के कृषि कर्ज पर मिले सब्सिडी

Mon, 07 Jan 2013 11:06 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 07 Jan 2013 11:06 PM IST
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subsidies on all type agricultural loans

आगामी बजट में कृषि के लिए दिए जाने वाले सभी तरह के कर्ज पर ब्याज में तीन फीसदी की छूट मिल सकती है। सरकार यदि देश के प्रमुख बैंकर्स की मांग को पूरा करती है, तो नए बजट में फसल कर्ज की तरह दूसरे कृषि कर्ज (टर्म लोन) के लिए ब्याज दर चार फीसदी हो सकती है। अभी समय पर फसल कर्ज चुकाने वाले किसानों को ब्याज में तीन फीसदी की छूट मिलती है।

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सूत्रों के अनुसार, सोमवार को देश के प्रमुख बैंकर्स की तरफ से बजट पूर्व चर्चा में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से यह मांग की गई है। बैंकर्स कृषि क्षेत्र के लिए दिए जाने वाले टर्म लोन पर ब्याज सब्सिडी के अलावा स्वयं सहायता समूह को दिए जाने वाले कर्ज पर ब्याज सब्सिडी चाहते हैं। इसके अलावा बैंकर्स ने कहा है कि गैर निष्पादक संपत्तियों (एनपीए) के लिए जो प्रोविजनिंग की जाती है, उस पर उन्हें आयकर में पूरी छूट मिले। अभी इस पर 7.5-10 फीसदी तक छूट मिलती है।
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बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने कहा कि बैंकों के पास टैक्स बचत करने वाले उत्पाद पहले से हैं। इसमें निवेश बढ़ाने के लिए लॉक इन अवधि को पांच साल से कम कर तीन साल किया जाना चाहिए।
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बैठक में मौजूद एक अन्य बैंकर के अनुसार बिजनेस कॉरस्पॉडेंट सेवाओं के लिए बैंकों को सर्विस टैक्स देना पड़ता है, इसे हटाया जाना चाहिए। इसी तरह बैंकर्स ने वित्त मंत्री को एलआईसी और सरकारी साधारण बीमा कंपनियों के विनिवेश करने का भी सुझाव दिया है।

बैठक में मौजूद गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने भी मांग की है कि बैंकों के समान जब उन्हें एनपीए मानकों के तहत लाने की तैयारी है, तो उसी तरह उन्हें आयकर में भी बैंकों के समान छूट मिले। इसके अलावा ईएमआई पर लगने वाले टीडीएस पर भी छूट मिलने की मांग कंपनियों ने की है।


बैठक में बैंकर्स के तरफ से यह भी मांग की गई है कि एक लाख रुपये तक की जमाओं पर अभी बीमा के लिए प्रीमियम बैंकों द्वारा दिया जाता है। जिस पर आरबीआई और बैंक को कर देना पड़ता है। इसे भी नए बजट में हटाया जाना चाहिए। बैठक में प्रमुख बैंकों के अलावा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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