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सुस्त अर्थव्यवस्था से भारत पर क्रेडिट रेटिंग घटने का खतरा
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 08 Nov 2013 03:59 PM IST
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ग्लोबल रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) ने चेताया है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था में आगे भी सुस्ती बनी रहती है, तो देश की क्रेडिट रेटिंग घट सकती है।
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एसएंडपी ने कहा है कि वह आम चुनाव के बाद भारत की क्रेडिट रेटिंग की समीक्षा करेगी और नई सरकार की नीतिगत घोषणाओं के आधार पर निर्णय करेगी।
एसएंडपी ने भारत की मौजूदा क्रेडिट रेटिंग ‘बीबीबी-’ को बरकरार रखते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कोई अप्रत्याशित वित्तीय गिरावट या वैश्विक चुनौतियों को छोड़ दें, तो आम चुनाव के बाद जब नई सरकार अपने नीतिगत एजेंडे की घोषणा करेगी, तब भारत की क्रेडिट रेटिंग की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।
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इसके साथ ही एसएंडपी ने आगाह किया कि यदि अगले वर्ष चुनाव के बाद नई सरकार ने सुस्त पड़ रही अर्थव्यवस्था को संभालने के समुचित उपाय नहीं किए, तो देश की क्रेडिट रेटिंग के घटने का खतरा हो सकता है।
एसएंडपी ने कहा है कि भारत की मौजूदा ‘बीबीबी-’ रेटिंग निवेश और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को देखते हुए तय की गई है लेकिन यदि इसमें किसी भी तरह की कमी आती है तो फिर निवेश के लिहाज से भारत की छवि दुनिया में जोखिम वाले देशों की जैसी हो जाएगी।
एसएंडपी के पहले मूडीज भी इस बात को लेकर आगाह कर चुकी है कि बढ़ते चालू खाता घाटे, कमजोर होते रुपये और सरकारी खजाने पर बढ़ते दबाव के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था की रेटिंग कभी भी घटाई जा सकती है।
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एसएंडपी का कहना है कि नई सरकार के सामने वित्तीय संतुलन को बेहतर बनाए रखना एक मुश्किल कार्य होगा। डीजल सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से हटाने और खाद्य सब्सिडी का खर्च वहन करने के अलावा खाद सब्सिडी व जीएसटी को देशभर में लागू करने पर आने वाले खर्चों के प्रबंधन से निपटना चुनौतीपूर्ण होगा।
दूसरी ओर, एसएंडपी ने सब्सिडी पॉलिसी पर भारत सरकार के मिलेजुले संकेत को एक सकारात्मक पहलू बताया है। सरकार की सब्सिडी पॉलिसी के तहत जहां सरकार ने घरेलू डीजल की कीमतों को नियंत्रणमुक्त करने का फैसला किया है। वहीं सरकारी तेल कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से घरेलू कीमतें बढ़ा रही हैं। सरकार की योजना इस साल के आखिर तक डीजल से सब्सिडी पूरी तरह समाप्त कर देने की है।
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सीएडी आ सकता है 3.7 फीसदी पर
चालू खाता घाटा (सीएडी) पर एसएंडपी ने कहा है कि सरकार द्वारा सोने के आयात पर लगाई गईं बाध्यताओं के चलते मार्च 2014 तक यह घटकर जीडीपी के करीब 3.7 फीसदी पर आ सकता है।
वहीं, राजकोषीय घाटे पर एजेंसी कहना है कि सरकार को चालू वित्तवर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.8 फीसदी के तय लक्ष्य में समेटना चुनाव खर्चों के स्तर और कमोडिटी कीमतों उतार-चढ़ाव पर आंशिक रूप से निर्भर करेगा।
‘बीबीबी-’ रेटिंग का क्या है मतलब
यह निवेश के लिहाज सबसे निचला ग्रेड है। यदि रेटिंग इससे एक पायदान नीचे आती है तो, यह विदेशी निवेश बाधित कर सकती है और निवेश के लिहाज से भारत की छवि दुनिया में जोखिम वाले देशों की जैसी हो जाएगी। वहीं, भारतीय कंपनियों को विदेशी कर्ज के लिए अधिक भुगतान करना पड़ेगा।