जानिए कैसे मील का पत्थर साबित होगी ओबामा की भारत यात्रा
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अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा में साथ आए अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल में शामिल जनरल एटॉमिक्स के ग्लोबल चीफ एक्जीक्यूटिव और कॉमर्शियल स्ट्रेटजिक डेवलपमेंट के इंचार्ज विवेक लाल के साथ अमर उजाला के सुजय मेहदूदिया ने विस्तृत बातचीत की। पेश हैं भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय सहयोग और संबंधों के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी इस बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा समझौतों और द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में आप राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा को किस तरह से देखते हैं?
रक्षा क्षेत्र सहित भारत-अमेरिका के बीच हर क्षेत्र में सहयोग के लिहाज से बराक ओबामा की भारत यात्रा मील के पत्थर जैसी है। भारत अमेरिका की नवीनतम तकनीक तक पहुंच के काफी करीब आ गया है।
भारत को विभिन्न प्रकार की रक्षा प्रणालियों के निर्यात की बाधाएं उस समय समाप्त होती दिखीं, जब ओबामा और मोदी ने कहा कि वह सेन डिएगो स्थित जनरल एटॉमिक्स द्वारा तैयार एयर क्राफ्ट कैरियर तकनीक को साझा करने की राह तलाश रहे हैं।
इससे स्पष्ट है कि रक्षा क्षेत्र में सहयोग कर लेकर काफी प्रगति हुई है। इस समय उन तकनीकों को चिह्नित किया जा रहा है जिनकी जरूरत भारत को है और जिनमें अमेरिका मदद कर सकता है।
एटॉमिक्स की तकनीक की उपयोगिता
जनरल एटॉमिक्स की तकनीक इस सब में किस तरह से उपयोगी हो सकती है?
जनरल एटॉमिक्स लांच सिस्टम का इस्तेमाल जेट व ड्रोन सहित कई प्रकार के युद्धक विमानों में किया जा सकता है। यह कई तरह के दायरों में बंधी मौजूदा तकनीक से काफी बेहतर है।
यह तकनीक भारतीय नौसेना को काफी आधुनिक बना सकती है, पर इसे भारत को मुहैया कराने के लिए कंपनी को अमेरिकी नौसेना की ओर से स्वीकृति के साथ निर्यात संबंधी मंजूरी भी लेनी होगी।
इस तकनीक का विस्तृत दायरा इसे मानव रहित विमानों सहित कई प्रकार के विमानों की लांचिंग और रिकवरी के लिए अनुकूल बनाता है।
यह अत्याधुनिक प्रक्षेपण प्रणाली से लैस है पर इसके संचालन के लिए बहुत ही कम लोगों की जरूरत पड़ती है। साथ ही ईंधन की खपत के मामले में भी यह काफी किफायती है।
जनरल एटॉमिक्स की प्रोफाइल
जनरल एटॉमिक्स (जीए) के उत्पादों और तकनीकों का दायरा काफी व्यापक है। कॉमर्शियल ग्लोबल स्ट्रेटिजिक डेवलपमेंट के चीफ एक्जीक्यूटिव के रूप में आप संस्थान के विस्तृत प्रोफाइल के बारे में कुछ बताएं।
जीए-ईएमएस उत्पादन व आरएंडडी दोनों ही क्षेत्रों में अग्रणी है। अधिक भरोसेमंद,कम ईधन खपत वाली तकनीक की बढ़ती मांग के बीच हम ऐसे ही इलेक्ट्रोमेग्नेटिक और इलेक्ट्रिक पावर कंपोनेंट विकसित और तैयार करते हैं।
हम कई तरह के इलेक्ट्रिक पावर जेनरेशन, प्रोपल्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और मॉनिटरिंग उपकरण व प्रणालियां तैयार करते हैं। इनका इस्तेमाल रक्षा, तेल-गैस, रसायन, ऊर्जा खनन, परमाणु ऊर्जा सहित शोध और प्रशिक्षण तक के क्षेत्रों में किया जाता है।
हम बाजार की जरूरतों के मुताबिक आधुनिकतम उत्पाद तैयार करने के लिए अनवरत शोध जारी रखते हैं। इससे हमारे ग्राहक अपने क्षेत्र के बाजार में अग्रणी बने रहते हैं।
जीए-ईएमएस की तकनीक और उत्पाद इसे किस तरह औरों से अलग बनाते हैं?
हमने हमेशा से ही तकनीकों इस्तेमाल सबसे अलग ढंग से किया है। इससे हमारे उत्पाद और सेवाएं हमेशा इस्तेमाल के लिए तैयार अवस्था (मिशन रेडी) में रहते हैं।
इसके लिए हमें ऊर्जा के दक्षतापूर्ण इस्तेमाल करने वाली और कम देखरेख की जरूरत व लंबे समय तक चलने वाली तकनीकी प्रणालियों का इस्तेमाल करना होता है। हमारे उत्पाद इन सभी मानदंडों पर खरे उतरने वाले होते हैं।
नौसेना बन सकती है आधुनिक?
क्या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लांच सिस्टम का इस्तेमाल करके भारतीय नौसेना को और उन्नत व आधुनिक बनाया जा सकता है?
अमेरिकी नौसेना से इसके भारत को निर्यात की मंजूरी मिलने पर यह सिस्टम निश्चित रूप से भारतीय नौसेना को काफी उन्नत बना सकता है।
लचीले ढंग से निर्मित यह प्रणाली मानव रहित विमानों से लेकर कई प्रकार के विमानों में इस्तेमाल की जा कसती है। यह निगरानी और सतर्कता के स्तर को भी काफी बढ़ा देती है।
इसके अलावा जीए भारत को किस तरह के उत्पाद मुहैया करा सकती है?
जीए के उत्पादों और प्रणालियों की रेंज काफी व्यापक है। हम रक्षा के साथ-साथ खनन, सौर ऊर्जा, स्मार्ट इलेक्ट्रिक पावर ग्रिड, जल और दूषित जल के प्रबंधन की प्रणालियां बनाते हैं।
इसके अलावा समुद्री और तेल-गैस क्षेत्र से जुड़े उपकरण और प्रणालियां भी तैयार करते हैं। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हम अपनी अत्यंत उन्नत निगरानी प्रणाली के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। हमें इस क्षेत्र में 40 वर्ष से भी ज्यादा का अनुभव है।