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देश में खुलेगा सोलर विश्वविद्यालय

Wed, 10 Dec 2014 09:03 AM IST
नई दिल्ली/ राजीव कुमार
नई दिल्ली/ राजीव कुमार Updated Wed, 10 Dec 2014 09:03 AM IST
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Solar university to launch in country

आने वाले समय में सोलर क्षेत्र में विशेषज्ञ इंजीनियर व कुशल तकनीशियनों की भारी मांग को देखते हुए नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) देश में सोलर विश्वविद्यालय शुरू करने की योजना बना रहा है। इस विश्वविद्यालय को सोसायटी की तरफ से बनाया जाएगा और यह सोसायटी सरकार की होगी। बिजली क्षेत्र से जुड़ी सार्वजनिक कंपनियां इसके ट्रस्ट में शामिल होंगी। मंत्रालय जल्द ही सोलर विश्वविद्यालय को लेकर कैबिनेट नोट जारी कर सकता है।

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दूसरी तरफ सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एमएनआरई ने देश भर में 25 सोलर पार्क बनाने की भी योजना है। इसके लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी से मंजूरी के लिए कैबिनेट नोट जारी कर दिया है। प्रत्येक पार्क की क्षमता 500 मेगावाट तक की होगी। इन सोलर पार्कों का निर्माण कार्य अगले पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य है। सरकार ने वर्ष 2019-20 तक सोलर की क्षमता में 40,000 मेगावाट विस्तार करने का लक्ष्य तय किया है।
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मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सोलर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पावर फाइनेंस कंपनी या विशेष रूप से गठित निकाय अथवा संस्था (स्पेशल पर्पस व्हीकल) को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक मुख्य रूप से बिजली से जुड़ी सार्वजनिक कंपनियां सोलर विश्वविद्यालय खोलने के लिए निवेश करेंगी। इस काम में जर्मनी का भी सहयोग लिया जा सकता है।
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सूत्रों के मुताबिक यह एक ग्लोबलविश्वविद्यालय होगा और यहां विश्व स्तर के सोलर विशेषज्ञों को पढ़ाने के लिए बुलाया जाएगा। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सोलर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जमीन की कोई समस्या नहीं है। गुड़गांव स्थित सोलर एनर्जी सेंटर और चेन्नई स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ विंड एनर्जी जैसी संस्थानों के साथ सोलर विश्वविद्यालय की स्थापना की जा सकती है।


एमएनआरई सूत्रों के मुताबिक देशभर में 25 सोलर पार्कों की स्थापना के लिए किसी सार्वजनिक कंपनी या स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) को नोडल एजेंसी नियुक्त करनी होगी, जो पार्क के विकास कार्य के लिए जिम्मेदार होगी। दूसरे तरीके के मुताबिक सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) के साथ राज्य की नोडल एजेंसी की संयुक्त कंपनी का निर्माण करना होगा। इसमें 50 फीसदी हिस्सेदारी एसईसीआई की होगी, तो 50 फीसदी राज्य सरकार की नोडल एजेंसी की। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक पहाड़ी इलाके में लगाए जाने वाले सोलर पार्क की क्षमता 500 मेगावाट से कम भी हो सकती है।

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