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सौर ऊर्जा से 10 साल में आएंगी 6.7 लाख नौकरियां

Mon, 08 Sep 2014 08:58 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 08 Sep 2014 08:58 AM IST
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Solar energy can create 6.7 lakh jobs in India over next 10 years

देश में सौर ऊर्जा से अगले दस साल में 6.7 लाख नौकरियों के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही बिजली उत्पादन की क्षमता इस अवधि में 145 गीगावाट (एक गीगावाट = 1,000 मेगावाट) तक बढ़ सकती है। ब्रिज टू इंडिया और टाटा पावर सोलर की एक साझा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

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ब्रिज टू इंडिया के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. टोबियास एंजेलमीयर का कहना है कि अलग-अलग प्रणालियों के जरिए भारत में सौर ऊर्जा की वास्तविक उत्पादन क्षमता 110 गीगावाट से 145 गीगावाट के बीच है। मुख्यत: चार तरह की सौर ऊर्जा प्रणालियों से अगले 10 साल में भारत में 6,75,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। लेकिन, असल मुद्दा भारत के लिए उपयुक्त सौर ऊर्जा प्रणाली का चयन करना है।
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रिपोर्ट में सौर ऊर्जा उत्पादन के चार अलग-अलग परिदृश्यों की तुलना की गई है। इसमें आवासीय रूफटॉप, लॉर्ज रूफटाप, यूटिलिटी स्केल प्रोजेक्ट और अल्ट्रामेगा प्रोजेक्ट शामिल हैं।
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टाटा पावर सोलर के सीईओ अजय गोयल का कहना है कि सौर ऊर्जा बिजली उत्पादन की असीमित क्षमता रखता है। चाहें, डिस्ट्रिब्यूटेड से सेंट्रलाइज्ड जेनरेशन की बात हो या आवासीय स्तर पर किलोवाट के उत्पादन से बड़े-बड़े प्लांटों से गीगावाट उत्पादन का मामला हो, इसमें निरंतर बदलाव की गुंजाइश अंतहीन है। अपनी अर्थव्यवस्था को ऊर्जावान बनाने के लिए जरूरी है कि हम परिदृश्यों की उचित मिलीजुली प्रणाली अपनाएं। जिसका आर्थिक और सामाजिक दोनों असर होगा।


रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में अल्ट्रा मेगा प्लांटों के बिजली उत्पादन की लेवेलाइज्ड लागत 6.6 रुपये प्रति किलोवाट और लैंडेड लागत 8.4 रुपये प्रति किलोवाट है। लंबी अवधि के नजरिए से देखा जाए तो सौर ऊर्जा के लिए बड़े रूफटॉप सिस्टम भारत के लिए सबसे सस्ते विकल्प होंगे। जिसके तहत, 2024 तक लेवेलाइज्ड उत्पादन लागत 6.6 रुपये प्रति किलोवाट और लैंडेड लागत 6.7 रुपये प्रति किलोवाट हो जाएगी।

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