{"_id":"3b15a66c-fcad-11e1-a185-d4ae52ba91ad","slug":"smes-emphasizing-on-learning-new-technology","type":"story","status":"publish","title_hn":"नई तकनीक सीखने पर एसएमई का जोर","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
नई तकनीक सीखने पर एसएमई का जोर
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 12 Sep 2012 01:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रतिस्पर्घा के इस दौर में छोटे व मझोले उद्योग (एसएमई) को तेज रफ्तार की विकास दर हासिल करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक पर जोर देना होगा। इसलिए अब एसएमई नई तकनीक, कारोबारी प्रतिस्पर्धाओं के अध्ययन पर अधिक ध्यान देने लगे हैं। इसके लिए कारोबारियों को एक ऐसा प्लेटफार्म मुहैया कराने की जरूरत है, जिसके माध्यम से वे कारोबारी गतिविधियों के बारे में जान सकें।
फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्मॉल ऐंड मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) के महासचिव अनिल भारद्वाज ने कहा कि इस उद्योग के विकास में प्रमुख बाधा तकनीक और जानकारी का अभाव होना है। उनका कहना है इस समस्या को दूर करने के लिए एसएमई संगठन अब इन पर अधिक जोर देने लगे है। फिस्मे ने कारोबारियों को उद्योग जगत से जुडी जानकारी मुहैया कराने, कारोबारी प्रतिस्पर्धी नीतियों और औद्योगिक टेस्टिंग लैबोरेटरी पर अध्ययन किया है।
इन अध्ययनों से निकले निष्कर्षो से सीख लेकर एसएमई कारोबार को बढ़ावा दे सकते हैं। फिस्मे ने इंडिया ट्रेड न्यूज नाम से पोर्टल लॉन्च किया, जिसके उपयोग से एसएमई कारोबारी संभावनाओं के बारे में जान सकेंगे। इसके अलावा एसएमई को भारत में औद्योगिक टेस्टिंग लैबोरेटरी और प्रतिस्पर्धी नीतियों पर भी अध्ययन किया गया है। इंडिया ट्रेड न्यूज पोर्टल बनाने वाले सिद्दार्थ कुमार ने कहा कि इंटरनेट मीडिया एसएमई के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि इस पोर्टल का उद्देश्य एसएमई क्षेत्र को मजबूत करना है।
विज्ञापन
कारोबारी पोर्टल के माध्यम से यह जानेंगे कि किस तरह समाचार-पत्रों और टीवी न्यूज चैनलों तक पहुंचा जाए, किस तरह प्रेस रिलीज बनाई जाए और अपने उत्पादों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी उद्योगों और लोगों तक पहुंचाई जाए। यह एसएमई संगठनों को मीडिया मैनेजमेंट के लिए प्लेटफार्म भी मुहैया कराएगा। सिद्घार्थ बताते है कि एसएमई क्षेत्र में 25-30 फीसदी उद्यमी ही मीडिया का सही से उपयोग करते है। इस हिस्सेदारी को बढ़ाने की आवश्यकता है। इस पोर्टल पर एसएमई क्षेत्र से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई जाएंगी।
वहीं, एपीजे-एसएलजी लॉ फर्म द्वारा कम्पिटीशन पॉलिसीज ऐंड एमएसएमई इन इंडिया नाम से एक रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें एमएसएमई विलय नियमन और नुससान की भरपाई के लिए विशेष उपबंध की सिफारिश की गई। इसके अलावा सेटलमेंट की प्रक्रि या को सरल और आसान करने की सिफारशि भी की गई है।
विज्ञापन
फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्मॉल ऐंड मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) के महासचिव अनिल भारद्वाज ने कहा कि इस उद्योग के विकास में प्रमुख बाधा तकनीक और जानकारी का अभाव होना है। उनका कहना है इस समस्या को दूर करने के लिए एसएमई संगठन अब इन पर अधिक जोर देने लगे है। फिस्मे ने कारोबारियों को उद्योग जगत से जुडी जानकारी मुहैया कराने, कारोबारी प्रतिस्पर्धी नीतियों और औद्योगिक टेस्टिंग लैबोरेटरी पर अध्ययन किया है।
विज्ञापन
इन अध्ययनों से निकले निष्कर्षो से सीख लेकर एसएमई कारोबार को बढ़ावा दे सकते हैं। फिस्मे ने इंडिया ट्रेड न्यूज नाम से पोर्टल लॉन्च किया, जिसके उपयोग से एसएमई कारोबारी संभावनाओं के बारे में जान सकेंगे। इसके अलावा एसएमई को भारत में औद्योगिक टेस्टिंग लैबोरेटरी और प्रतिस्पर्धी नीतियों पर भी अध्ययन किया गया है। इंडिया ट्रेड न्यूज पोर्टल बनाने वाले सिद्दार्थ कुमार ने कहा कि इंटरनेट मीडिया एसएमई के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि इस पोर्टल का उद्देश्य एसएमई क्षेत्र को मजबूत करना है।
विज्ञापन
कारोबारी पोर्टल के माध्यम से यह जानेंगे कि किस तरह समाचार-पत्रों और टीवी न्यूज चैनलों तक पहुंचा जाए, किस तरह प्रेस रिलीज बनाई जाए और अपने उत्पादों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी उद्योगों और लोगों तक पहुंचाई जाए। यह एसएमई संगठनों को मीडिया मैनेजमेंट के लिए प्लेटफार्म भी मुहैया कराएगा। सिद्घार्थ बताते है कि एसएमई क्षेत्र में 25-30 फीसदी उद्यमी ही मीडिया का सही से उपयोग करते है। इस हिस्सेदारी को बढ़ाने की आवश्यकता है। इस पोर्टल पर एसएमई क्षेत्र से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई जाएंगी।
वहीं, एपीजे-एसएलजी लॉ फर्म द्वारा कम्पिटीशन पॉलिसीज ऐंड एमएसएमई इन इंडिया नाम से एक रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें एमएसएमई विलय नियमन और नुससान की भरपाई के लिए विशेष उपबंध की सिफारिश की गई। इसके अलावा सेटलमेंट की प्रक्रि या को सरल और आसान करने की सिफारशि भी की गई है।