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स्मार्ट सिटी बनने से बढ़ेगा सिरामिक टाइलों का कारोबार

Mon, 22 Dec 2014 09:12 AM IST
नई दिल्ली /ब्यूरो
नई दिल्ली /ब्यूरो Updated Mon, 22 Dec 2014 09:12 AM IST
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smart city will help to promoto cerimic tiles
लग्जरी टाइल बाजार में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली कंपनी सोमानी सिरामिक्स लिमिटेड अपने वितरकों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी में है। इसके साथ ही कंपनी प्रधानमंत्री के 100 नए स्मार्ट सिटी विकसित करने की योजना से उत्साहित है। इसका कहना है कि इतनी संख्या में स्मार्ट शहरों की संख्या बढ़ने का फायदा इस क्षेत्र को भी मिलेगा, क्योंकि हर घर में तो सिरामिक्स टाइलों का तो उपयोग होगा ही होगा। अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने कामकाज और भविष्य की योजनाओं पर सोमानी सिरामिक्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक अभिषेक सोमानी से विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के संपादित  अंश:
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प्रधानमंत्री ने देश में 100 नए स्मार्ट शहर बनाने की घोषणा की है। क्या प्रतिक्रिया है आपकी?

उत्तर- देश में 100 नए स्मार्ट शहर बनेंगे तो हमारे लिए इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है। जब भी नया मकान बनता है तो उसमें टाइलों का भी उपयोग होता है। यहां तो नए शहर बसेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक सबके लिए आवास की भी घोषणा की है। इससे भी सिरामिक्स के सामानों की मांग बढ़ेगी।
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चालू वित्त वर्ष के दौरान अबतक आपके कारोबार की विकास दर कैसी रही है और पूरे वर्ष में क्या रहने की संभावना है?

इस समय देखें, तो सिरामिक्स उद्योग में सालाना 10 से 12 फीसदी की विकास दर देखने को मिल रही है। हमारा कारोबार 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2014-15 में अनुमान है कि हमारी विकास दर 20 फीसदी से ऊपर ही रहेगी, कम नहीं।
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भारत का लगभग हर उद्योग चीन से होने वाले सस्ते आयात से परेशान है। आपके क्षेत्र में भी ऐसा कुछ है?
उत्तर- बिल्कुल मौजू सवाल पूछा है आपने। हमारा क्षेत्र भी चीन से आने वाले सस्ते माल से परेशान है। देश में जो सिरामिक्स टाइलें बनती हैं, उसके मुकाबले चीन से आने वाली टाइलों की कीमतें करीब 10 फीसदी कम हैं। इससे हमारा उद्योग परेशान है। हमने इस बारे में सरकार से भी शिकायत की है। सरकार को घरेलू उद्योग को चीन से होने वाले सस्ते आयात से सुरक्षा देनी चाहिए।

सिरामिक्स टाइल्स उद्योग में स्थानीय स्तर पर भी कंपनियां उभर रही हैं और कई ब्रांडेड कंपनियां भी काम रही हैं। क्या स्थिति है बाजार की?

इस क्षेत्र में संगठित क्षेत्र की बाजार हिस्सेदारी आधे से ज्यादा की है। इनमें से 60 फीसदी बाजार पर सोमानी, कजारिया और एचआर जॉनसन का कब्जा है। हम इसमें छोटे खिलाड़ी हैं, जबकि कजारिया और एचआर जॉनसन बड़े खिलाड़ी हैं।

मार्बल और ग्रेनाइट क्षेत्र से आपको कैसी चुनौती मिल रही है?

यह बात सही है कि हमें मार्बल और ग्रेनाइट क्षेत्र से चुनौती मिल रही है, लेकिन हम चिंतित नहीं हैं। पहले हमारी टाइलें दो बाई दो फुट की होती थीं, लेकिन अब यह तीन बाई चार और चार बाई चार फुट की भी आ रही हैं। मार्बल 20 से 30 मिलीमीटर मोटा होता है, जबकि हमारी टाइलें 10 मिलीमीटर मोटी होती हैं। इन्हें लगाना सुविधाजनक है और रख-रखाव भी आसान है। इसलिए अब लोग मार्बल के मुकाबले टाइल को प्राथमिकता देने लगे हैं।

पिछले कुछ दिनों से रीयल एस्टेट बाजार में सुस्ती का माहौल है, इससे आपके कारोबार पर कोई प्रभाव?

उत्तर- प्रभाव पड़ा है। हमने पहले सोचा था कि इस क्षेत्र की विकास दर 14-15 फीसदी की रहेगी, लेकिन यह 10-12 फीसदी पर ही है। हमने भी सोचा था कि हमारी विकास दर 25 फीसदी रहेगी, लेकिन यह 18-20 फीसदी पर टिक गई।


आपकी विस्तार की क्या योजना है?

हमने दक्षिण भारत में एक उत्पादन इकाई लगाने की योजना बनाई है, लेकिन गैस आपूर्ति का मसला हल नहीं होने की वजह से कुछ तय नहीं हो पाया है। जैसे ही गैस आपूर्ति का मसला हल होगा, हम तय कर लेंगे कि प्लांट कहां लगाएंगे। इसके अलावा हम वितरण तंत्र को मजबूत करना चाहते हैं। अभी हमारे 75 फीसदी वितरक बी और सी श्रेणी के शहरों में हैं। हम अब डी और ई श्रेणी के शहरों तक जाएंगे और वहां वितरण तंत्र मजबूत करेंगे।
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