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छोटे उद्यमियों के लिए कारोबार करना होगा आसान!

Tue, 02 Apr 2013 11:01 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 02 Apr 2013 11:01 PM IST
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एमएसएमई सेक्टर के तहत कारोबारी प्रक्रिया को आसान करने की तैयारी है। इसके तहत कारोबारियों को जहां कम से कम कागजी कार्यवाही करनी होगी।

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वहीं इंस्पेक्टरों के दखल में भी कमी लाने की कवायद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय कर रहा है।

मंत्रालय इन सभी लक्ष्यों को पाने के लिए पूरे सेक्टर के लिए एक स्पेशल पैकेज की मंजूरी दिलाने की योजना पर काम कर रहा है।

मंगलवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) केएच मुनियप्पा ने कहा कि छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए मंत्रालय एक स्पेशल पैकेज लाने पर काम कर रहा है।
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इसके अलावा मंत्रालय पिछले साल से शुरू छोटे और मझोले कारोबारियों की सरकारी खरीद नीति की भी जल्द समीक्षा करने जा रहा है, जिससे कारोबारियों की समस्याओं को दूर किया जा सके। मुनियप्पा ने यह जानकारी छोटे और मझोले कारोबारियों को मिलने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार के संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।
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स्पेशल पैकेज के बारे में मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'अमर उजाला' को बताया कि हमारी कोशिश इसके तहत सेक्टर के कारोबारियों के लिए कारोबारी प्रक्रिया को आसान करना है।

जिसमें इंस्पेक्टर का कम से कम दखल हो, कागजी कार्यवाही कम हो, साथ ही कारोबारियों को खुद ही ज्यादा जवाबदेह बनाने पर जोर हो।

अधिकारी के अनुसार मंत्रालय अगले दो से तीन हफ्ते में पैकेज की रूपरेखा तैयार कर लेगा। उसके बाद संबंधित विभागों की मंजूरी और कैबिनेट की मंजूरी की प्रक्रिया शुरू होगी।

सरकारी खरीद नीति के लिए पीएसयू प्रमुखों के साथ समीक्षा
केएच मुनियप्पा ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि सरकारी खरीद नीति अप्रैल 2012 में शुरू हुई थी, जिसकी समीक्षा के लिए मंत्रालय सभी सार्वजनिक विभागों के प्रमुखों के साथ जल्द बैठक करेगा। सरकारी खरीद नीति के तहत सार्वजनिक विभागों को अपनी कुल खरीदारी में से 20 फीसदी (अभी ऐच्छिक) छोटे कारोबारियों से करनी है। इसमें से 20 फीसदी अनुसूचित जाति और जनजातियों से की जानी है।


निर्यात क्षेत्र में हिस्सेदारी गिरी
अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर एमएसएमई सेक्टर के निर्यात पर भी पड़ा है। देश के कुल निर्यात में एमएसएमई सेक्टर की हिस्सेदारी करीब चार फीसदी कम हो गई है। मौजूदा जानकारी के मुताबिक सेक्टर की हिस्सेदारी 40 फीसदी से कम होकर 36 फीसदी पर आ गई है। मंत्रालय अब इसे पुराने स्तर पर ले जाने के लिए अहम कदम उठाने की बात कह रहा है।

हर जिले में 100 नए कारोबारी बनाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मंत्रालय देश के हर जिले में 100 नए कारोबारी तैयार करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। नए कारोबारी हर साल बनाए जाने की तैयारी है।

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