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छोट-मझोले उपक्रमों की बदलेगी परिभाषा

Thu, 14 Feb 2013 12:42 AM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव Updated Thu, 14 Feb 2013 12:42 AM IST
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small and medium enterprises definition will be change

छोटे और मझोले कारोबारियों को कर्ज ज्यादा और आसानी से मिलने का रास्ता आने वाले दिनों में आसान हो सकता है। सरकार छोटे और मझोले वर्ग के तहत आने वाले निवेश संबंधी नियमों को उदार करने जा रही है। इस कदम से छोटे और मझोले उपक्रम वर्ग (एमएसएमई) के तहत ज्यादा कारोबारी शामिल हो सकेंगे, जिससे उन्हें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम क्षेत्र के तहत मिलने वाले लाभ मिल सकेंगे।

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि साल 2006 में बने कानून के तहत 10 करोड़ रुपये तक के निवेश वाले उपक्रम ही एमएसएमई के तहत आते हैं। कानून बनने के छह साल बाद निवेश की बढ़ी लागत को देखते हुए यह राशि काफी कम है। ऐसे में अभी बहुत से ऐसे कारोबारी हैं जो एमएसएमई के तहत मिलने वाली सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
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मौजूदा लागत को देखते हुए छोटे कारोबारी होने के बावजूद वह बड़े कारोबारी वर्ग के तहत आते हैं। वह कहीं से भी बडे़ कारोबारियों की तरह कारोबार नहीं कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें एमएसएमई वर्ग के तहत लाने की जरूरत है। जिससे उन्हें कर्ज आसानी से मिल सके और वह कोलैट्रल गारंटी, क्रेडिट लिंक सब्सिडी, रेटिंग प्राप्त करने में छूट आदि की सुविधा का लाभ ले सकें।
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अधिकारी के अनुसार ऐसे में मंत्रालय निवेश सीमा संबंधी नियमों में नए तरह के बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसके लिए मौजूदा कानून में संशोधन के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने बताया कि भविष्य में कारोबारी लागत में होने वाले बदलावों को देखते हुए मंत्रालय ने यह प्रस्ताव तैयार किया है कि नए संविधान संशोधन विधेयक में यह व्यवस्था की जाए कि मंत्रालय अधिसूचना के जरिए निवेश सीमा में बदलाव कर सके।

अभी ऐसा करने के लिए संशोधन विधेयक लाना जरूरी है, जो एक लंबी और पेचीदा प्रक्रिया है। अधिसूचना के जरिए निवेश संबंधी नियमों में बदलाव का अधिकार मिलने से इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक समय-समय पर बदलाव काफी कम समय में किया जा सकेगा।

मौजूदा कानून के तहत प्लांट और मशीनरी में 25 लाख रुपये तक के निवेश को सूक्ष्म उद्यम, 25 लाख से ज्यादा और पांच करोड़ रुपये तक के निवेश को लघु उद्यम और पांच करोड़ से ज्यादा और 10 करोड़ रुपये तक के निवेश को मध्यम उद्योग माना जाता है। इसी तरह, सेवा क्षेत्र में पांच करोड़ रुपये तक की सीमा तय की गई है।


अधिकारी के अनुसार, नए प्रस्ताव में सभी वर्ग के तहत निवेश सीमा बढ़ाई जाएगी। जिससे ज्यादा से ज्यादा कारोबारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम वर्ग के तहत मिलने वाले लाभ प्राप्त कर सकेंगे। चौथे सर्वेक्षण के अनुसार देश में अभी 2.61 करोड़ छोटे और मझोले उपक्रम हैं।

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