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औद्योगिक उत्पादन में फिर आई सुस्ती

Fri, 11 Jan 2013 11:09 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 11 Jan 2013 11:09 PM IST
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slowdown in industrial production

देश के औद्योगिक उत्पादन में एक बार फिर सुस्ती के संकेत दिखे हैं। गत नवंबर में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 0.1 फीसदी गिरा है जबकि अक्टूबर के दौरान इसमें 8.3 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई थी। नवंबर के आंकड़े से जाहिर है कि अक्टूबर में सुधार औद्योगिक उत्पादन स्थायी नहीं रहा और इसमें उतार-चढ़ाव जारी है। आईआईपी में आई गिरावट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बढ़ गया है। आगामी 29 जनवरी को आरबीआई मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा।

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वित्त वर्ष 2012-13 में अप्रैल से नवंबर तक आईआईपी सिर्फ एक फीसदी बढ़ा है जबकि गत वर्ष इसी अवधि में इसमें 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। नवंबर में आई गिरावट विनिर्माण और खनन क्षेत्र की सुस्ती का असर है, जिसमें सिर्फ 0.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। खनन क्षेत्र का उत्पादन 5.5 फीसदी गिरा है। कैपिटल गुड्स के उत्पादन में सबसे ज्यादा 7.7 फीसदी की कमी हुई है। आईआईपी में गिरावट के लिए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने सांख्यिकी कारणों की देन बताया है। उनका कहना है कि हमें दिसंबर के नतीजों का इंतजार करना चाहिए। सरकार की ओर से उठाए गए कदम आने वाले महीनों में असर दिखाएंगे।
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दिसंबर में हुई मौद्रिक नीति की समीक्षा ने आरबीआई ने अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन में हुए जबरदस्त सुधार को मद्देनजर रखते हुए सरकार के दबाव के बावजूद ब्याज दरों में कटौती का फैसला टाल दिया था। अब आईआईपी में गिरावट के बाद आरबीआई पर ब्याज दरों में कमी का दबाव बढ़ गया है।
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प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन का कहना है कि अगले तिमाही में स्थिति सुधर सकती है और चालू वित्त वर्ष की विकास दर 5.7 फीसदी हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि ब्याज दरों पर फैसला लेते समय आरबीआई सभी तथ्यों को ध्यान में रखेगा।

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