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सिंगूर से साणंद जाने में खत्म हुआ नैनो का आकर्षण
कोलकाता/एजेंसी
Updated Thu, 07 Aug 2014 06:17 PM IST
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टाटा समूह के मानद अध्यक्ष रतन टाटा का मानना है कि नैनो प्लांट को पश्चिम बंगाल के सिंगूर से हटाने के कारण टाटा मोटर्स की ‘लखटकिया कार’ नैनो के प्रति पैदा हुआ आकर्षण खत्म हो गया, जिससे यह कभी उबर नहीं पाई। टाटा के मुताबिक नौनो प्लांट की शिफ्टिंग से उत्पादन शुरू होने में देरी के चलते नैनो के बाजार में आने को लेकर लोगों का भरोसा डगमगा उठा।
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लेडीज स्टडी ग्रुप ऑफ इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स के समारोह में टाटा ने कहा कि ‘लखटकिया कार’ की घोषणा के साथ ही पूरी दुनिया का ध्यान सिंगूर पर टिक गया था। महज 2,500 डॉलर की कार को लेकर बाजार में गजब का उत्साह था। तीन लाख कारों की अग्रिम बुकिंग तक हो चुकी थी।
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नैनो को पाने के लिए दो साल तक की प्रतीक्षा अवधि चल रही थी, लेकिन सिंगूर में उत्पादन शुरू नहीं हो पाने के कारण लोगों को लगा कि शायद कार कभी बाजार में आ ही नहीं सकेगी। दूसरी ओर इसने हमारे प्रतिद्वंद्वियों को कार की बुराई करने का मौका भी दे दिया।
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टाटा ने गुजरात के साणंद में नैनो के लिए ‘दूसरा घर’ उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री और राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति कृतज्ञता जताते हुए कहा कि दूसरे राज्यों को भी उनसे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों की नीति उद्योगों को बढ़वा देने की होनी चाहिये, हतोत्साहित करने की नहीं। सिंगूर से प्लांट हटाने के बारे में उन्होंने कहा कि यह उनकी जिंदगी की दो सबसे मुश्किल घड़ियों में से एक थी।