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बाजार में हाहाकार, रुपया 66 के पार, सोना 32 हजार
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 27 Aug 2013 08:50 PM IST
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खाद्य सुरक्षा बिल के सहारे भले ही यूपीए सरकार चुनावी नैया पार करने का सपना देख रही है, पर उस दिशा में उठे कदम बाजार और रुपए को रास नहीं आ रहे हैं।
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सोमवार की शाम लोकसभा में इस बिल के पारित होने के बाद मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया जहां अभी तक के सबसे निचले स्तर पर चला गया, वहीं शेयर बाजार में शेयर चारों खाने चित हो गए।
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रुपया 194 पैसे की सर्वाधिक एक दिनी गिरावट के साथ 66.24 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 66.30 रुपए तक गिरा था।
शेयर बाजार में हाहाकार रहा और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 590 अंकों की तगड़ी गिरावट के साथ 18 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 17,968 पर बंद हुआ। निफ्टी 189 अंक गिरकर 19 माह के सबसे निचले स्तर 5,287 पर बंद हुआ।
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सराफे में भारी हलचल रही और सोने-चांदी में तूफानी तेजी आई। सोने की कीमतों में गिरावट की आस लगाए लोगों को झटका देते हुए सोना स्थानीय हाजिर बाजार में 500 रुपए की छलांग के साथ 32 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया।
यहां रुपए के गिरने की मनाई जा रही हैं खुशियां
हालांकि, एमसीएक्स के कारोबार में यह 33 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के पार कारोबार करता नजर आया। चांदी भी 800 रुपए बढ़कर 54,800 रुपए प्रति किलो हो गई। एमसीएक्स पर चांदी 56 हजार के पार कारोबार करती दिखी।
अभी तक सरकार ग्लोबल कारणों को रुपए में कमजोरी की प्रमुख वजह बता रही थी। यह पहला मौका है जब वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने गिरावट के पीछे घरेलू कारणों को स्वीकार किया है।
लगातार गिरते रुपए की वजह से जहां आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। वहीं कॉरपोरेट जगत पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है।
इसे देखते हुए कॉरपोरेट जगत ने भी सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा बिल लागू करने के समय पर सवाल उठाए हैं।
महंगे पेट्रोल-डीजल के लिए रहिए तैयार
रुपए के कमजोर पड़ने से पेट्रोलियम के आयात पर डॉलर का खर्च बढ़ रहा है। पेट्रोल की कीमतें बाजार के हवाले होने के बाद रुपए में लगातार कमजोरी आ रही है, जिससे इसकी कीमतें भी बढ़ती रहती हैं।
हर पखवाडे़ पेट्रोल की नई दरें आती हैं। रुपए में तगड़ी गिरावट की वजह से इस बार पेट्रोल की कीमत में तगड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। मानसून सत्र के बाद डीजल की कीमतों में तीन रुपए तक की वृद्धि हो सकती है।
रुपए में विदेश व्यापार पर जोर
रुपए में रिकॉर्ड गिरावट को देखते हुए सरकार डॉलर के बजाय रुपए में विदेश व्यापार को बढ़ावा देना चाहती है। मंगलवार को हुई बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक में विभिन्न देशों के साथ करेंसी स्वैप (मुद्राओं की अदला-बदली) की संभावना तलाशने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया गया है।
वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सीधे रुपये से जापानी येन, चाइनीज युआन और इराकी दीनार में आयात-निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशें चल रही हैं।
मंदी से बचने के प्रयास में बिगड़ी रुपए की हालत
रुपए में आ रही गिरावट के लिए वित्त मंत्री ने वैश्विक के अलावा घरेलू कारणों को भी जिम्मेदार माना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 की मंदी से निबटने के लिए कई ऐसे फैसले लिए गए, जिनसे देश का राजकोषीय घाटा तेजी से बढ़ा।
राजकोषीय घाटे पर होगा असर
उद्योग जगत के प्रमुख संगठन सीआईआई ने सरकार को खाद्य सुरक्षा बिल के खतरों से चेताया है। सीआईआई के अध्यक्ष क्रिस गोपालकृष्णन के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में खाद्य सुरक्षा बिल लागू होने से राजकोषीय घाटे पर नकारात्मक असर होगा। इसे संभालने की जरूरत है।
‘इस आर्थिक संकट की नींव 2008-09 में रख दी गई थी, जब सरकार ने चुनाव जीतने के लिए फिजूलखर्ची की। इसका असर मुद्रास्फीति पर पड़ा। सरकार की अकर्मण्यता और फैसले न लेने की आदत से भी परिस्थितियां बिगड़ी। चिदंबरम अर्थव्यवस्था का इलाज करने में नाकाम डॉक्टर साबित हुए हैं।’--यशवंत सिन्हा, भाजपा नेता व पूर्व वित्तमंत्री