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खराब मानसून के बावजूद अनाज उत्पादन बेहतरः पवार
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 Feb 2013 11:19 PM IST
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खरीफ सीजन मे मानसून की लेट-लतीफी और कई हिस्सों में सूखे की स्थिति के बावजूद चालू कृषि वर्ष (जुलाई 12-जून 13) में अनाज का उत्पादन उम्मीद से बेहतर हुआ है। कृषि मंत्री शरद पवार के मुताबिक सूखा और ओलावृष्टि का असर खरीफ की सभी फसलों पर रहा। इससे चालू वर्ष में अनाज उत्पादन पिछले साल से 3.5 फीसदी घटकर 25.01 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया गया है। पिछले वर्ष से उत्पादन कम रहने के बावजूद देश मे अनाज का संकट नहीं है, बल्कि उत्पादन घरेलू खपत को देखते हुए पर्याप्त है।
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चालू कृषि वर्ष में अनाज उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान जारी करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग सभी फसलों के उत्पादन में कमी दर्ज की गई है, लेकिन इसके पूर्व के वर्षों के मुकाबले फिर भी बेहतर है। इस वर्ष चावल का उत्पादन 10.18 करोड़ टन और गेहूं का उत्पादन 9.23 करोड़ होने की संभावना है। इसी प्रकार मोटे अनाजों का उत्पादन 3.84 करोड़ टन और दलहनों का उत्पादन 1.76 करोड़ टन होने का अनुमान लगाया गया है। तिलह०नों का उत्पादन भी 2.95 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना है।
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पवार के मुताबिक कपास उत्पादन पिछले वर्ष के 3.52 करोड़ गांठ (170 किलो) के मुकाबले इस वर्ष 3.38 करोड़ गांठ ही रहने की आशंका है। इसी प्रकार गन्ने की पैदावार भी गत वर्ष 36.10 करोड़ टन के बजाय इस वर्ष 33.45 करोड़ टन हो सकती है। कृषि मंत्री का कहना है कि पिछले वर्ष देश के कई प्रमुख हिस्सों में मानसून की वर्षा सामान्य से कम हुई थी।
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वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात में सूखे की स्थिति बनी। इसका सीधा असर खरीफ की सभी फसलों पड़ा, लेकिन देर से हुई बरसात से जमीन में नमी की मात्रा अच्छी रहने का फायदा मौजूदा रबी फसलों को मिला है। इससे कुल अनाज उत्पादन मे ज्यादा असर नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार दलहन और खाद्य तेल के ज्यादा आयात से चिंतित हैं। इनके आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। इन दोनों जिंसों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए बीज में नयी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल समय की मांग है। बीज कृषि का महत्वपूर्ण तत्व है।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को बेहतर उत्पाद पेश करने के लिए सरकार के बीज बदलने के प्रयास में भागीदारी करनी होगी ताकि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि महत्वपूर्ण बीज विधेयक लंबे समय से लंबित है। उम्मीद है कि आगामी बजट सत्र में इस विधेयक पर चर्चा होगी।