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रिजर्व बैंक ने कर्ज किया महंगा, बढ़ेगी ईएमआई

Fri, 20 Sep 2013 08:23 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 20 Sep 2013 08:23 PM IST
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त्योहारों के मौसम से ठीक पहले सस्ते कर्ज की राह में बढ़ती महंगाई एक बार फिर दीवार बन गई है।

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इस पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर के रूप में अपनी पहली मौद्रिक नीति की समीक्षा में रघुराम राजन ने कर्ज की दर (रेपो रेट) एक चौथाई फीसदी बढ़ाकर 7.50 फीसदी कर दिया।

इस बढ़ोतरी से घर से लेकर कार खरीदने तक का सपना महंगा हो जाएगा।

रघुराम राजन ने बैंकों के लिए नकदी की उपलब्धता बढ़ाने के कुछ कदमों की घोषणा की है जिससे कि वे आसानी से कर्ज दे सकें। लेकिन राजन के सारे कदमों से साफ है कि महंगाई पर काबू पाना ही उनकी प्राथमिकता है।
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राजन का मानना है कि महंगाई और रेपो रेट का नाता बड़ा गहरा है, महंगाई बढ़ेगी तो रेपो रेट को ऊपर जाना ही होगा।

शेयर बाजार निराश

नए गर्वनर के कदमों को शेयर बाजार ने नकारात्मक लिया और बृहस्पतिवार को बाजार में आई तेजी का जश्न शुक्रवार को सेंसेक्स में 383 अंक की भारी गिरावट के साथ खत्म हो गया।
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ग्रोथ की तुलना में महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी से उद्योग जगत भी चकित है।

बैंक ने नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में कोई बदलाव न कर उसे चार फीसदी पर बरकरार रखा है।

नकदी की उपलब्धता आसान
पिछले दिनों डॉलर के मुकाबले रुपए में आई मजबूती को देखते हुए रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए नकदी की उपलब्धता आसान कर दी है।

इसके लिए रिजर्व बैंक ने मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी (एमएसएफ) रेट में 0.75 फीसदी की कमी कर उसे 9.5 फीसदी और बैंक रेट को घटाकर 9.5 फीसदी कर दिया है।

इसके अलावा रिजर्व बैंक ने सीआरआर को बनाए रखने के लिए बैंकों की प्रतिदिन 99 फीसदी राशि रखने की बाध्यता को भी घटाकर 95 फीसदी कर दिया है।

रिजर्व बैंक के इस कदम से बैंक अपनी ब्याज दरें बढ़ाएंगे जिससे मकान और कार का सपना थोड़ा और दूर हो जाएगा। जिन लोगों की ईएमआई चल रही है, उनके किस्त की रकम बढ़ जाएगी। उदाहरण के तौर पर 20 साल की अवधि वाले 20 लाख रुपए के होम लोम लोन पर 337 रुपए मासिक अधिक देने होंगे। इसी तरह, कार की ईएमआई भी बढ़ जाएगी।

फेड के फैसले पर खुश होने की जरूरत नहीं
हमें अमेरिकी फेड रिजर्व के फैसले पर बहुत खुश होने की जरूरत नहीं है। बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को इस बात के लिए तैयार होना होगा कि जब फेड रिजर्व राहत पैकेज वापस ले, तो उसका हमारी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर कम हो। हमें एक ‘बुलेट प्रूफ बैलेंस शीट’ बनानी होगी। साथ ही ग्रोथ के एजेंडे पर काम कर देश के नागरिकों का आत्मविश्वास बढ़ाना होगा।

पूंजी की लागत कम करने की कोशिश
आज की मौद्रिक नीति का प्रमुख एजेंडा बैंकों के लिए पूंजी जुटाने की लागत कम करना था। इसी के तहत आज के कदम उठाए गए हैं। यदि आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, तो बैंकों के लिए और ऐसे कदम उठाए जाएंगे।

रुपए की मजबूती के लिए कदम

हमारा प्रमुख जोर रुपए को लेकर फिर से विश्वास बढ़ाने पर है। जिससे कि भारतीय मुद्रा दूसरे देशों की मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हो सके। साथ ही वह अपने उचित स्तर पर आ सके। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भारत को ग्लोबल बांड इंडेक्स में शामिल करने के लिए भी बात करेंगे।

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने वित्त वर्ष 2013-14 के लिए देश की आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाकर 4.8 फीसदी कर दिया है। इससे पहले जून में उसने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.7 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया था। फिच ने घरेलू मांग में कमी के कारण अर्थव्यवस्था में सुस्ती का हवाला देते हुए अपनी ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में जीडीपी के अनुमान में यह कटौती की है।


आने वाले दिनों में महंगे कर्ज की मार पड़ेगी। रेपो रेट में बढ़ोतरी से जमा दरों के साथ-साथ कर्ज की दरों में बढ़ोतरी होगी।- प्रतीप चौधरी, चेयरमैन, भारतीय स्टेट बैंक

कितनी बढ़ेगी ईएमआई
20 लाख रुपए का होम लोम लोन 20 साल की अवधि पर
मौजूदा ब्याज दर---ईएमआई---संभावित ब्याज दर---नई ईएमआई---कितना बढ़ा
10.50---19,968---10.75---20,305---337

चार लाख रुपए का कार लोन पांच साल की अवधि पर
12.0---8,898---12.25---8,948---50
(ब्याज दरें फीसदी में और ईएमआई व वृद्धि रुपए में)

मौद्रिक नीति के मुख्य बिंदुः-

- रेपो दर 0.25 फीसदी बढ़कर 7.50 प्रतिशत।
- मार्जिनल स्टैंडिग फैसिलिटी 0.75 फीसदी कम होकर 9.5 फीसदी।
- नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) 4 फीसदी पर पूर्ववत।
- सीआरआर की दैनिक तरलता सीमा 99 प्रतिशत से घटकर 95 प्रतिशत पर।
- महंगाई दर को देखते हुए आगे नीतिगत दरों में नरमी की उम्मीद कम।
- आर्थिक विकास दर दूसरी छमाही में बेहतर होने की उम्मीद।

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